• अब साहब के "रडार" पर कल्लू, कहेगा “रब्बा इश्क ना होवे”

     

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    बात जब निकलती है तो दूर तलक जाती है अब साहब ने भी अपनी खुफिया टीम को कल्लू के पीछे

    लगा दिया है। कल्लू की बेनामी और नामी संपत्तियो के कागज देख साहब के होश भी फाख्ता है वो सोच

    रहे है कि इस कल्लू को गद्दे की रुई की तरह कैसे धुना जाए।

    देहरादून में घुसते ही बंद पड़े कारखानो वाला राज भी साहब तक पहुँच गया। नामी, बेनामी, नौकर-चाकर

    सब के नाम पर और नदी, खाले, सभी पतरी देख साहब दाँत पीस रहे है।

    सूत्र की माने तो साहब कर्री रिपोर्ट बना कर सरकारी जाल कल्लू पर डालने की कवायद कर रहे है।

    क्योकि साहब तीसरी आँख से हुये जख्म भूले नहीं है जिसको कल्लू द्वारा अंजाम दिया गया था। अब

    कल्लू को भी खबर लग चुकी है कि साहब की अरही घुसने वाली है तो कल्लू ने अपने जवां खून को

    दिमाग दिया कि कमल के फूल वाले भंवरों को जरा चारा डाल दो कम से कम हमारे प्रति चीनी कम ना हो।

    जंवा खून नेतुर्रा-ए-पुर-पेच-ओ-खमका पासा फेक दिया और जैसे साहब को घेरा था वैसे कमल वाले भँवरे भी जाल में फंस गए और अब नोट के साथ कल्लू अपनी मन मर्जी का सपोर्ट भी लेगा।

    अब जैसा सोचते है अधिकतर होता वैसा नहीं है भंवरो को वश में कर लिया कल्लू ने लेकिन भँवरो के सरदार के पास कल्लू और पूरे खानदान की जन्म कुंडली पहुँच गयी। अब साहब और कमल के भँवरो के सरदार दोनों कल्लू की कायनात ध्वस्त करने में साथ-साथ है।

    अब मसमसाया हुआ कल्लू भाई, साहब को ढेर-ढेर और अनाप-शनाप बकने में है पर कल्लू एक बात भूल गया कि बुड्ढे शेर के पंजे की खरोच भी खतरनाक होती है।

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  • जीन्स के बाहर अंडरवियर प्लांट करने वाला अधिकारी

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    आजकल के फैशन के हिसाब से लोग आजकल जीन्स के बाहर अंडरवियर दिखाते है, चड्डी अगर महंगी कंपनी की है तो ज्यादा बाहर मुह निकाल लेती है। इसके उलट उत्तराखंड की राजधानी देहारादून में एक ऐसा प्राधिकरण भी है जो इसके उलट काम करता है।

    अंडरवियर अगर महंगी है तो हाई वेस्ट जीन्स पहना देता है और अगर लो क्लास या मीडियम क्लास है तो ऐसे उधेड़ता है कि आम आदमी अंडरवियर छोड़ भाग ले।

    प्राधिकरण के अधिकारी बयान तो ऐसे देते है जैसे पुराने समय लोग पिक्चर देखते हुये चिल्लर फेकते थे। सफेदपोश और रसूखदार लोगो को तो ऐसे ट्रीट किया जाता है जैसे नया-नया दामाद घर आया हो।

    एक अधिकारी के संरक्षण में टोंस नदी का रुख मोड़कर नियमो के विपरीत वहाँ पर आलीशान होटल का निर्माण किया जा रहा है।

    रिजर्व ग्रीन फॉरेस्ट में प्राधिकरण के राज ज्योतिष ने रिज़ॉर्ट/आश्रम बनवा दिया और दिखाने की कार्यवाही के नाम पर नोटिस काट कर इतिश्री कर ली।

    सचिवालय से महज़ 500 मीटर पर कितना बड़ा अवैध निर्माण कार्य चल रहा है और प्राधिकरण के अधिकारी बोलते है कि नोटिस काट दिया है और वाद चल रहा है, उस अवैध निर्माण को रोकने का काम कौन करेगा ?

    धोरणखास में लगभग 25 बीघा में दो बिल्डरों ने अवैध प्लाटिंग कर दी और उसमे से एक हरियाणा का बिल्डर है और प्राधिकरण ने  नोटिस काट कर इतिश्री कर ली। वहाँ पर काम कौन रोकेगा ?

    प्राधिकरण के गूंगे बहरे अधिकारियों सरकार आपको सैलरी देती है और आप क्या करते है? सरकार को कोर्ट के कटघरे मे खड़ा करते है।

    सिर्फ आप जैसे निर्लज्ज अधिकारियों की वजह से सरकार के कामो पर कोर्ट को हस्ताक्षेप करना पड़ता है और ये फजीहत का कारण कौन है?

    सरकार के मुखिया अब मूड मे आ गए है, अभी देखा ना टेलर एनएच74 वाला। सरकार के मुखिया को तो पूरे प्राधिकरण का अंकेक्षण करवाना चाहिए। ताकि कितना लपोड़ के घी कौन-कौन घर ले गया है उसकी भी पिक्चर रिलीज़ हो और तब जनता तुम्हारी पिक्चर देख चिल्लर उछाले।

    जीरो टालरेंस की सरकार के मुखिया जल्द ही ऐसे भ्रस्ट अधिकारियों की जीन्स और अंडरवियर दोनों उतार कर उनके पिछवाड़े पर संटी बजाने वाले है ताकि भ्रस्टाचार पर लगाम लगे और भ्रस्टाचारियों को सबक मिले ।

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