• लालू के RJD परिवार में फूंट!

     

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    बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू यादव के बेटे तेज प्रताप के कुछ ट्वीट्स ने राज्य की राजनीति में एक नई चर्चा शुरू कर दी है। तेज प्रताप ने एक ट्वीट के जरिए यह कहने की कोशिश की है कि वह राजनीति से संन्यास ले सकते हैं और 'सबकुछ' अपने भाई तेजस्वी के हाथों में सौंप सकते हैं।

    बाद में इसी मुद्दे पर बात कहते हुए तेज प्रताप ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा, 'पार्टी के लोग मेरा फोन नहीं उठाते हैं और कहते हैं कि उन्हें ऐसा करने के लिए वरिष्ठ नेताओं की ओर से कहा गया है। मेरे और मेरे भाई के बीच में कोई मतभेद नहीं है। हमें उन तत्वों को पार्टी से निकालना होगा, जो हमें तोड़ना चाहते हैं। मैं चाहता हूं कि सीनियर नेता ऐसे लोगों को पहचानें और उनको बाहर करें।'

    'असामाजिक तत्वों को पार्टी से निकालना होगा'
    तेज प्रताप ने मीडिया से बात करते हुए यह भी कहा, 'हमें असामाजिक तत्वों को पार्टी से निकालना होगा। राजेंद्र पासवान जैसे लोगों ने हमारे लिए मेहनत की है। जब मैंने लालू जी, राबड़ी जी और तेजस्वी को कहा तब उन्हें पद दिया गया। यह सब इतनी देरी से क्यों किया गया?'

    दरअसल, तेज प्रताप ने एक ट्वीट में लिखा, 'मेरा सोचना है कि मैं अर्जुन को हस्तिनापुर की गद्दी पर बैठाऊं और खुद द्वारका चला जाऊं। अब कुछएक 'चुगलों' को कष्ट है कि कहीं मैं किंगमेकर न कहलाऊं।' तेज प्रताप के इस ट्वीट से कयास लगाए जा रहे हैं कि उनके और तेजस्वी के बीच कुछ गड़बड़ चल रही है।

    तेजस्वी को बताया कलेजे का टुकड़ा
    तेजस्वी के बारे में बोलते हुए तेज प्रताप ने कहा, 'वह मेरे कलेजे का टुकड़ा है। असामाजिक तत्वों की कोशिश है कि भाई-भाई को लड़वाने की। उनकी कोशिश है कि पार्टी को तोड़ो, लालू यादव को तोड़ों लेकिन हम कभी ऐसा होने नहीं देंगे। वरिष्ठ नेताओं को चाहिए कि ऐसे लोगों को चिह्नित करें और उनको बाहर निकालें।'

    'तोड़ने वालों से सावधान रहना जरूरी'
    हालांकि, तेज प्रताप ने एक और ट्वीट किया है और कहा है कि उनकी पार्टी को एकता में सेंध लगानेवालों से बचना चाहिए। उन्होंने लिखा, 'आरजेडी और गठबंधन सहयोगियों के सामने 2019 के लिए एक नई सरकार बनाने की बड़ी जिम्मेवारी है लेकिन हमें उन असामाजिक तत्वों से सावधान रहना है, जो इस एकता में सेंध लगाना चाहते हैं। जय भीम, जय बहुजन, जय मंडल, जय हिंद।' आपको यह भी बता दें कि जिस अकाउंट से ये ट्वीट्स किए गए हैं, वह वेरिफाइड अकाउंट नहीं है।

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  • शिवसेना की तरफ से PM उम्मीदवार होंगे प्रणव!

     

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    एनडीए की अहम सहयोगी शिवसेना ने शनिवार को कहा कि 2019 के आम चुनाव में अगर बीजेपी पूर्ण बहुमत पाने में असफल रहती है तो पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी प्रधानमंत्री पद के सर्वामान्य उम्मीदवार हो सकते हैं।

    इसके साथ ही उन्होंने पूर्व शिवसेना अध्यक्ष बाला साहेब ठाकरे को कभी भी मंच पर नहीं बुलाने और इफ्तार पार्टियों के आयोजान के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर निशाना साधा।

    शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में यह टिप्पणी गुरूवार को प्रणब मुखर्जी के आरएसएस कार्यक्रम में शामिल होने के दो दिन बाद ऐसे वक्त पर की गई है जब बीजेपी और शिवसेना के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।

    आरएसएस मुख्यालय पर जाने को लेकर मुखर्जी के दौरे की उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी समेत कई नेताओं ने आलोचना की और चौतरफा प्रतिक्रिया देखने को मिली। 

    मुखर्जी के दौरे का विरोध करने को लेकर कांग्रेस की आलोचना करते हुए शिवसेना ने उसे 'बिना आवाज वाले पटाखे' करार दिया। जबकि, आरएसएस पर इस बात को लेकर निशाना साधा कि आखिर क्यों उन्होंने वरिष्ठ नेता को चुना जो नेहरू के दिल के करीब हैं। 

    संपादकीय में आगे यह कहा गया है कि आरएसएस के थिंक टैंक भविष्य की राजनीति में ऐसे दौरों (प्रणब मुखर्जी उनमें से एक) का इस्तेमाल करेगी। उनके दिमाग में इस खास कार्यक्रम को लेकर क्या है वह सिर्फ 2019 के लोकसभा चुनाव के वक्त ही पता चला पाएगा।

    इसमें आगे कहा गया है कि दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है कि चुनाव के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए प्रणब मुखर्जी सर्वमान्य उम्मीदवार हो सकते हैं। अगर बीजेपी चुनाव में लोकसभा के लिए जरूरी आंकड़े जुटाने में असफल रहती है तो मुखर्जी सर्वमान्य उम्मीदवार हो सकते हैं।

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