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उत्तराखंड में कुछ अधिकारी ऐसे है जो सत्ता मे आसीन राजनेताओ की चाभी अपनी पाकिट में रखकर घूमते है। उन्हे किसी ट्रान्सफर पोस्टिंग की कोई चिंता नहीं होती क्योकि वो हर काम वो अपने तरीके से करना जानते है। सालो तक एक ही विभाग में काबिज, सालो तक अपनी मनमानी, ऐसा हुनर है उत्तराखंड के अधिकारियों में, इसी को तो दम कहते है।

पत्रकारो को तो अधिकारी च्विगम की तरह समझते है कि बस चबाया और थूक दिया। उन अधिकारियों को ये नहीं पता कि कुछ पत्रकार ऐसे भी होते है जो होते तो चवन्नी के च्विंगम है और अगर बालो में चिपक जाये तो मुंडन करा के ही मानते है।

खोजी नारद द्वारा जब भी कोई स्टोरी लिखी जाती है तो कई दलाल सक्रिय हो जाते अपना मतलब साधने के लिए और एक नेपाली गटुए दलाल को आगे कर दिया जाता है। खोजी नारद के शब्दो को भी कॉपी किया जाता है। अब ऐसे लोगो का असल चेहरा दिखाने का वक़्त करीब है और उनको खोजी नारद की हिदायत भी है और चंद पंक्तियाँ भी :-

                   " मेरा ख्याल तेरी चुप्पियों को आता है"

                    "तेरा ख्याल मेरी हिचकियों को आता है"

अब जीरो टोलरेंस की सरकार मे ऐसे दलालो और ऐसे अधिकारियों से मेरी बेपनाह मुहब्बत का वक़्त करीब आ गया है और जब खोजी नारद ऐसी मुहब्बत करता है तो अंजाम और परिणाम सरकार के पक्ष मे जरूर आते है।

कुछ भ्रस्ट अधिकारियों ने अपने चरम को पार कर दिया है, अपने बैंक खातो को भी और अपने रिश्तेदारों के खातो को भी, जिनको बेनकाब करना जरूरी है।

ये अधिकारी ऐसे है कि सरकार कोA से Z तक का पूरा ज्ञान करवाते है, appele से शुरू होकर zebra पर आ जाते है। सही मायने मे तो फल से शुरू होते है और जानवर पर खत्म होते है।

उन अधिकारियों से मेरा कहना है कि कुछ पत्रकार उत्तराखंड के ऐसे भी है जिन्होने आ से लेकर ज्ञा तक पढ़ा है। अ का मतलब अनपढ़ और ज्ञा का मतलब ज्ञानी पर खत्म होते है।

ज्ञानी लोगो से जरा बच कर रहिए कही ऐसा ना हो कि सत्ता की चाभी पाकिट मे रखकर घूमने वालों तुम्हारी बारात में तुम भी पिटो और बाराती भी।

कुछ ऐसे नेपाली भी है जो नाटी गुल्ली बने हुये है अपने आपको ऐसा पत्रकार बताते है जैसे जीबी रोड का चर्चित कोठा नंबर 64 हो। फुददु बनाने की दुकान सिर्फ सचिवालय मे घुसकर ऐसे चलाते है जैसे इनका बाप औरंगजेब हो।

खबरों के नाम पर सिर्फ कानाफूसी और चुगली है जिसको दोहरी नागरिकता वाले पैतरेकार ही कर सकते है। अब खोजी नारद पर ऐसे नट्टों का पर्दाफाश होगा जिन्होने देवभूमि को सिर्फ अपने मंसूबो की गेमभूमि बना दिया है।

उत्तराखंड अब परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है यहाँ के मुख्यमंत्री “मै” से नहीं हम से शुरू करते है और इसी हम में वो ताकत है जो ऐसे अधिकारियों की उनकी सही जगह कहाँ है, पहुंचाना जानते है।

ऐसे अधिकारियों और पैतरेकारो जो उतराखंड के मुख्यमंत्री के खिलाफ धुआँ धार प्रचार करते है उनको ये नहीं पता कि उनकी अंदर धार तो बची नहीं है सिर्फ धुआँ-धुआँ बचा है।

अभी उत्तराखंड में देखा है टेलर मुख्यमंत्री जी का 23 सूरमा जेल पहुँच गए है, उनका भूत तो उतर गया है अब तुम्हारे जैसे लोगो का भी भूत जल्द उतरेगा। अभी तुम्हारा टिकट वेटिंग में है जो जल्द ही क्न्फर्म होने की उम्मीद है।

 

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