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देहारादून। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जब से उत्तराखंड राज्य में बीजेपी के डबल इंजन की सरकार के सेनापति बने है, तब से कुछ लोगो के गले में बांस के रूप में फंसे पड़े है, ना कुछ खाते बन रहा है और ना कुछ निगलते। अब ऐसे लोगो ने एक रणनीति के तहत अपने कुछ लोगो को त्रिवेन्द्र रावत जी के खेमे मे घुसा दिया। अब वही लोग मुख्यमंत्री के अच्छे कर्मो का “कांड” करने में लगे हुये है। सब किए कराये पर ऐसे लोग लोटा लेकर पानी डालने के काम में जुटे हुये है। अब मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत क्या करे? उनकी आंखो पर ऐसे सलाहकारो ने सिपली इलम वाला जादू कर ऐसा मायाजाल बुन रखा है कि उनको भी राज्य में अच्छे दिन नज़र आ रहे है।

अभी 4 दिन पहले इन्वेस्टर सम्मिट सम्पन्न हुया सब कुछ बढ़िया चल रहा था राज्य हित में, पर एक विडियो ने बड़ा “कर्मकांड” करवा दिया। अब इस वाइरल विडियो के कारण ऐसी मट्टी पलीद हो रही है कि ना त्रिवेन्द्र जी को उगलते बन रहा है और ना थूकते। विपक्ष ने भी वाइरल विडियो पर तरकश से तीर निकाल कर बौछार शुरू कर दी है।

गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने को लेकर111 दिनों से अनशन कर रहे वयोवृद्ध पर्यावरणविद एवं वैज्ञानिक प्रो. जीडी अग्रवाल (स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद) का गुरुवार (11 अक्टूबर) दोपहर को निधन हो गया। उन्हें बुधवार को हरिद्वार प्रशासन ने ऋषिकेश के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया था। जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद ने ऋषिकेश के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में प्राणों की आहुति दे दी। स्वामी सानंद ने नौ अक्टूबर से जल भी त्याग दिया था। वह गंगा की अविरलता और निर्मलता को लेकर तपस्यारत थे।

अब त्रिवेन्द्र सिंह रावत खुद मुख्यमंत्री बनने से पहले नमामि गंगे के राष्ट्रीय संयोजक रहे है, क्या आपको इतना ज्ञान भी ना था कि गंगा पर कानून बनाने के लिए गंगा पुत्र 111 दिनो अनशन पर है और आप उनका अनशन ना तुड़वा सके, उनको मना ना सके। क्या आपके उत्कृष्ट सलाहकार ने आपको इतनी छोटी सी सलाह ना दी?

खैर छोड़िए मै एक बात भूल गया था कि सलाहकार महोदयो को सिर्फ लोटा लेकर पानी डालना आता है।

अब मुख्यमंत्री जी आप अपने विकास के पहिये को ऐसे सलाहकारो के दम पर चलायेंगे तो वो इसमें सुआ लेकर पंक्चर ही करेंगे और आपको बोलेंगे कि पहिये में कंकड़ फ़स गया था, वही निकाल रहा था। आपको मानना भी पड़ेगा क्यूकि अच्छे दिन वाला चश्मा जो पहना रखा है।

त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी अच्छे "कर्म" करने से कुछ हासिल ना हो रहा हो तो "सलाहकारो का कांड" कर दीजिये, नहीं तो यही सलाहकार जो विभीषण बने हुये है वो आपकी सरकार का “कर्मकांड” करवाकर ही मानेंगे।

आपको सिर्फ इतना जी कहना है किसंसार के प्रति हमारा ज्ञान उन शब्दों में सीमित है जिन्हें हम जानते हैं। जितने अधिक शब्दों को हम जानेंगे हमारासंसार उतना ही बड़ा होगा,उतना ही बड़ा हमारा कुआं भी होगा। सूचना क्रांति का धन्यवाद जिसके कारण हमअधिक स्थानोंऔर सूचनाओको देख सकते हैं और अधिक शब्दों को जान सकते हैं लेकिन समय अभी भी एक बंधन है। हम अभीभी कुएं के मेंढक हैं।

कूपमंडूक कुएं से बाहर बाहर निकल सकता है लेकिन वह अपने को दूसरे कुएं में पाएगा,ऐसे कुएं में जहां दीवारक्षितिज से बनी है,वो कभी क्षितिज से मुक्त नहीं हो सकता है।

 कुएं की दीवार और क्षितिज की परिधि दोनों चक्र या पहिए की तरह आकार वाली हैं। एक चक्रवर्ती वो होता है जोस्वंय को ब्रह्मांड का अधिपति कहता है लेकिन वास्तव में एक कूपमंडूक ही है,क्योंकि उसका शासन उसके क्षितिजकी सीमाओं में बंधा है। इससे बाहर उसका कोई नियंत्रण नहीं है।

लेकिन हम अपने क्षितिज और कुएं के आकार को बढ़ा सकते हैं। इसके लिए हमें हमारे ज्ञान को बढ़ाते हुए औरअपनी समझदारी को विस्तृत करते हुए विकास करना होगा। हमें और लोगों से जुड़ना होगा,उनके कुओं का पताकरना होगा और यह भी पता लगाना होगा कि उनके कुएं हमें विस्तृत या संकुचित बनाएंगे।

ऐसे सलाहकार जिनकाप्रारब्धही कुछ अलग है और उन्होने आज तक पूर्व में भी आपकी खिल्ली उड़वाने का कोई मौका ना छोड़ा हो, उनसे दूरी बनाए, और धरातल पर उतरकर राज्य हित मे कार्य करे। "खोजी नारद" और "जनमत टुडे" आपको जल्द ही ऐसे सलाहकारो और विभीषणों का असली चेहरा दिखाएंगे। क्यूकि ऐसे विभीषणों पर खोजी नारद उसखम्बे तरह है, कि हरकुत्ता जो है, वो टांग पे टांग टिकाये फूटपाथ पे लेटे-लेटे सामने लगेखोजी नारद रूपीखम्बे को घूर रहा हैक्यूकिइस खम्बे ने हीपूर्व में भीउसकी धार से उसी को करंट दे दिया था।

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