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उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड (212)

उत्तराखण्ड (पूर्व नाम उत्तरांचल), उत्तर भारत में स्थित एक राज्य है जिसका निर्माण 9 नवम्बर 2000 को कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात भारत गणराज्य के सत्ताइसवें राज्य के रूप में किया गया था। सन 2000 से 2006 तक यह उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था। जनवरी 2007 में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया। राज्य की सीमाएँ उत्तर में तिब्बत और पूर्व में नेपाल से लगी हैं। पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश इसकी सीमा से लगे राज्य हैं। सन 2000 में अपने गठन से पूर्व यह उत्तर प्रदेश का एक भाग था। पारम्परिक हिन्दू ग्रन्थों और प्राचीन साहित्य में इस क्षेत्र का उल्लेख उत्तराखण्ड के रूप में किया गया है। हिन्दी और संस्कृत में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है। राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं।

देहरादून, उत्तराखण्ड की अन्तरिम राजधानी होने के साथ इस राज्य का सबसे बड़ा नगर है। गैरसैण नामक एक छोटे से कस्बे को इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भविष्य की राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया है किन्तु विवादों और संसाधनों के अभाव के चलते अभी भी देहरादून अस्थाई राजधानी बना हुआ है। राज्य का उच्च न्यायालय नैनीताल में है।

राज्य सरकार ने हाल ही में हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये कुछ पहल की हैं। साथ ही बढ़ते पर्यटन व्यापार तथा उच्च तकनीकी वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए आकर्षक कर योजनायें प्रस्तुत की हैं। राज्य में कुछ विवादास्पद किन्तु वृहत बाँध परियोजनाएँ भी हैं जिनकी पूरे देश में कई बार आलोचनाएँ भी की जाती रही हैं, जिनमें विशेष है भागीरथी-भीलांगना नदियों पर बनने वाली टिहरी बाँध परियोजना। इस परियोजना की कल्पना 1953 मे की गई थी और यह अन्ततः 2007 में बनकर तैयार हुआ। उत्तराखण्ड, चिपको आन्दोलन के जन्मस्थान के नाम से भी जाना जाता है।

Wednesday, Jun 21 2017
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राजधानी देहारादून का एक अधिकारी आज कल "बिलबिलाया" हुआ घूम रहा है और जगह-जगह जनहित मे काम करने वाले नेताओ  को "ब्लैकमेलर" शब्द से संबोधित करता हुआ सुनाई दे रहा है। इस अधिकारी को पत्रकार भी काफी घेरे रहते है और जैसे ही उनकी पीठ घूमती है वैसे ही उनके पिछवाड़े  उन्हे ब्लैकमेलर जैसे शब्दों से सुशोभित करने से ज़रा भी नहीं चूकता। इस बतोलेबाज अधिकारी की जब खोजी नारद से आंखे चार हुई तो हमें ये एहसास हुआ की एक "वाइरस" इनके दिमाग को खोखला कर रहा है।

Saturday, Jun 17 2017
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ये सच है हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का सपना है स्वच्छ गंगा, निर्मल गंगा, के अभियान को उत्तराखंड के देहारादून मे एक बिल्डर द्वारा धता बताते हुए छाती चौड़ी कर आसन नदी के रकबे की भूमि पर अवैध फ्लैटो का निर्माण और प्लाटिंग कर रहा है। पूर्व मे भी खोजी नारद की टीम द्वारा सुमेरु इन्फ्रास्ट्रक्चर नदी की भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर खबर प्रकाशित कर चुका है।

जबकि मोदी जी के द्वारा गंगा की सफाई के लिए अभियान शुरू हो गया है। गंगा सफाई का काम गंगा के उद्गम स्थल उत्तराखंड से शुरू किया जा चुका है। जबकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत खुद प्रधानमंत्री के इस ड्रीम प्रोजेक्ट से शुरू से जुड़े रहे हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत को भाजपा द्वारा नमामि गंगे का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया था, अब वह राज्य के मुख्यमंत्री बन गए हैं तो उन पर मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने की बड़ी जिम्मेदारी भी है।

इसके उलट बिल्डर राजेश जैन द्वारा आसन नदी का सीना चीरा जा रहा है करोड़ो रूपये के खनिज जैसे रेता, बजरी, बोल्डर नदी से निकाल कर बेच दिये गये और किसी को कानोकान भनक भी ना लगी ऐसा कैसे हो सकता है।

उत्तराखंड के सीएम इतने बड़े घोटाले पर चुप क्यो है?

ऐसा क्या है कि एक अदना सा बिल्डर नदी की भूमि को खुर्दबुर्द कर बेच रहा है और प्रधानमंत्री के 56 इंच के सीने को टक्कर दे रहा है और माननीय सीएम साहब के मुँह पर ताला लटका हुआ है।

आखिर आदरणीय सीएम साहब एवं प्रशासनिक अधिकारीगण मुँह मे कौन सा लोलीपॉप चूस रहे है कि जिससे उनकी बोलती बंद है।

बिल्डर राजेश जैन और नरेंद्र कुमार जैन ( नंदी जैन ) का पक्ष लेते ईस्ट होप टाउन के ग्राम प्रधान के पति तज्जमुल हुसैन का आप स्टिंग देखे कि वो शिकायतकर्ता को कैसे धमका रहे है और ये भी बोल रहे है कि 50 या 100 बीघा नदी की जमीन से कौन सा तूफान आ जाएगा।

शिकायतकर्ता आज़ाद अली को हर तरीके से देख लेने की बात करते दिख रहे है। आप खुद स्टिंग देखे:-

स्टिंग देखने के लिए लिंक पर क्लिक करे : https://youtu.be/ffz1D8or0cwदेखे स्टिंग

इस पूरे मामले मे मसूरी देहारादून विकास प्राधिकरण का रवैया भी संदेह के घेरे मे या यू भी कह सकते है टेबल के नीचे बड़ी अटैची का खेल भी खूब हुआ होगा? कुछ ज्वलंत सवाल ऐसे है जिसका जबाब तो अब पब्लिक भी मांग रही है।

क्यूकि साहब ये पब्लिक है यह सब जानती है अंदर और बाहर की हवाओ का रुख पहचानती है। पब्लिक के कुछ सवाल है जिनके जबाब जानने का उनको पूरा अधिकार है : -


1- 2013 से सुमेरु इन्फ्रास्ट्रक्चर बड़ोवाला मे फ्लैटो का निर्माण कर रहा है तो 2015/16 मे मानचित्र कैसे स्वीक्रत हुआ? जबकि कॉम्पाउंडिंग मानचित्र दाखिल होना चाहिए, करोड़ो रूपये के राजस्व की हानी किसने कारवाई?

2- सुमेरु इन्फ्रास्ट्रक्चर एक ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट है जबकि मानचित्र राजेश जैन के नाम से स्वीक्रत है, तो कैसे सुमेरु इन्फ्रास्ट्रक्चर और ईस्टन आर्क के नाम से बिल्डर मार्केटिंग कर रहा है ये भी बात गले से नीचे नहीं उतरती?

3- नदी के रकबे की भूमि पर प्राधिकरण ने मानचित्र कैसे स्वीक्रत कर दिया क्या राजेश जैन द्वारा जमा किए गए कागजो की जांच करने की जहमत भी अधिकारियो ने नहीं उठाई, ऐसा क्यो?

मसूरी देहारादून विकास प्राधिकरण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों के बारे मे और देश मे गंगा और यमुना एवं उसकी सहायक नदियो पर चल रही परियोजनाओ तक की जानकारी नहीं है और यही अधिकारी और प्राधिकरण के कर्मचारी कितने आम आदमियो को चूसकर उनका कचूमर बना देते है ये बात पूरे उत्तराखंड को पता है। क्यूकि रिश्वत लेने के मामले मे प्राधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी अभी तक जेल की हवा खा रहे है । खोजी नारद के द्वारा आपको अभी और विडियो दिखाये जाएंगे जिससे उक्त बिल्डर और बड़े अधिकारियों का पर्दाफाश होगा ।

इस भूमाफिया से संबन्धित खबरों को पढ़ने के लिए नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक करे : -

क्या भगवान शिव के नाम पर सुमेरु इन्फ्रास्ट्रक्चर ने किया ऋषिमुनि की तपस्थली पर कब्ज़ा ?

चिरकुट बिल्डर ने बेचे पत्रकार! (बिक भी गए और पता भी ना चला)

क्या NH 74 जैसा है सुमेरु इन्फ्रास्टक्चर का घोटाला?

मेरे माथे पर "सी...... लिखा है और तुम क्या बी......." हो ?

Wednesday, Jun 14 2017
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प्रिय पाठको कुछ गलत ना समझे जो आप समझ रहे है ये शब्द वही है, बस मै आपसे खेल रहा हूँ क्यूकि मैं "चतुर बनिया" हूँ। इस द्रोणनगरी मे दशको पूर्व एक विभाग बना चतुर बनिया विकास प्राधिकरण पर असल मे विभाग का नाम कुछ और है। जब मै यानि पत्रकार उर्फ ( भांड, ब्लैकमेलर, फर्जी, दलाल ) जब से जवान हुआ हूँ इस विभाग का आंकलन कर रहा हूँ।

Saturday, Jun 10 2017
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विशेष संवाददाता सौरभ चटर्जी की रिपोर्ट:-

शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़कर आसन नदी की गोद मे एक और ताजमहल बनाने का सपना कथित बिल्डर को कही इतिहास दोहराने पे इतना मजबूर ना कर दे कि अपने ही अपनो के हाथ काटने पर आमदा ना हो जाये। बहरहाल खबर लिखने कि शुरुआत मे खोजी नारद की टीम सिर्फ इतना कहना चाहती है कि : -

"अब तो दिल भी अड़ा है एक बच्चे कि तरह जिद्द पर,
  कि जंहा उन्हे जिद्द है आशियाँ बनाने कि
  हमे भी जिद्द है वही बिजली गिराने की "

इस समय उत्तराखंड विधान सभा सत्र चल रहा है और एनएच 74 घोटाले का मुद्दा भी गरमाया हुआ है। देहारादून के बड़ोवाला मे स्थित सुमेरु इन्फ्रास्टक्चर द्वारा अवैध प्लाटिंग और फ्लेटों का निर्माण चल रहा है। देहारादून के राजस्व विभाग द्वारा विगत कुछ दिनो पहले उक्त ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट की जमीन को नापने पहुँचा था और

Tuesday, Jun 06 2017
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खोजी नारद को सूत्रो के हवाले से खबर मिली है कि एक भू-माफिया द्वारा अपनी कब्जाई जमीन को बचाने के लिए करोड़ो खर्च किए जा रहे है। देहारादून के एक प्रसिद्ध साहूकार से बिल्डर बने भूमाफिया ने अपनी सैकड़ो बीघा जमीन बचाने के लिए अपने "चिलांडिसों" की फ़ौज को आगे कर दिया है।

अभी कुछ रोज पहले एक नामी ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी की नदी की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर खबर सुर्ख़ियो मे रही थी, वहाँ पर खबर कवरेज करने गए इलेक्ट्रानिक मीडिया के जुझारु पत्रकारो ने जब खबर ले जाकर अपने चैनल मे दी, तो खबर चलाने की बजाए चैनल के असली मालिक (घोड़े पर सवार और मर्ज) ने खबर सहित पूरे देहारादून के पत्रकारो का ठेका ले लिया और उक्त भूमाफिया की सूचना विभाग के आला अधिकारी से मीटिंग करवा सभी प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकार, इस माफिया की अवैध कब्जे वाली खबर ना छापे ऐसी मोटी डील करवा डाली । जबकि "खालिस पत्रकारो" को खरीदना मुश्किल ही नहीं नामुंकिन है।  निजी चैनल के बिल्डर मालिक ने अपने डंडे जैसे "फूंतरु" के साथ मे अपना भोकाल भी दिखा उस भूमाफिया के साथ उक्त जमीन मे हिस्सेदारी भी कब्जा ली। अब इन जैसे सफेदपोश लल्लंनटॉप टाइप चिरकुटों के लिए सिर्फ इतना काफी है, "अब देखना ये होगा कि कितने पत्रकार मशहूर होंगे इनको बेनक़ाब करते करते"

अब फिलहाल भू-माफिया प्रशासन और सरकार मे डील करवा रहा है ताकि राजस्व विभाग उसके पक्ष मे रिपोर्ट दे। इस भू-माफिया बिल्डर ने प्रशासन से लेकर सरकार तक सबको गुमराह कर रखा है, तभी तो आज तक इसके ऊपर हाथ डालने मे सभी कतराते रहे। उक्त बिल्डर के इतने घोटाले है की अगर वो उजागर हो गए तो इस माफिया का अरबों का साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ढेर हो जाएगा । इस भू-माफिया बिल्डर का पूरा कच्चा चिट्ठा जल्द आपके सामने होगा ।

Wednesday, May 31 2017
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सुमेरु नाम का अर्थ होता है "शिव", और हिन्दू धर्म मे शिव का नाम आते ही हम अपने अराध्य भगवान शिव को याद करते है। सुमेरु इन्फ्रास्ट्रक्चर एक ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट बड़ोवाला देहारादून मे बना रहा है, जिसमे देहारादून के नामी गिरामी लोगो का नाम जुड़ा है ।

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