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क्या NH 74 जैसा है सुमेरु इन्फ्रास्टक्चर का घोटाला?

विशेष संवाददाता सौरभ चटर्जी की रिपोर्ट:-

शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़कर आसन नदी की गोद मे एक और ताजमहल बनाने का सपना कथित बिल्डर को कही इतिहास दोहराने पे इतना मजबूर ना कर दे कि अपने ही अपनो के हाथ काटने पर आमदा ना हो जाये। बहरहाल खबर लिखने कि शुरुआत मे खोजी नारद की टीम सिर्फ इतना कहना चाहती है कि : -

"अब तो दिल भी अड़ा है एक बच्चे कि तरह जिद्द पर,
  कि जंहा उन्हे जिद्द है आशियाँ बनाने कि
  हमे भी जिद्द है वही बिजली गिराने की "

इस समय उत्तराखंड विधान सभा सत्र चल रहा है और एनएच 74 घोटाले का मुद्दा भी गरमाया हुआ है। देहारादून के बड़ोवाला मे स्थित सुमेरु इन्फ्रास्टक्चर द्वारा अवैध प्लाटिंग और फ्लेटों का निर्माण चल रहा है। देहारादून के राजस्व विभाग द्वारा विगत कुछ दिनो पहले उक्त ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट की जमीन को नापने पहुँचा था और

विभाग द्वारा अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौप दी गयी । रिपोर्ट सौपे 3 दिन बीत गए है और उच्च अधिकारी हमेशा वीआईपी डूयटी की बात कह पल्ला झाड़ते दिख रहे है ।

कार्यवाही करने मे कितने साल लगेंगे ये कहना भी मुश्किल है। इन्ही सबके बीच सुमेरु इन्फ्रास्टक्चर के मालिको की पौबारह हो रही है उनको चाहिए भी यही कि जांच मे जितनी देरी होगी उतना उनका फायदा है। खोजी नारद की टीम को ये भी जानकारी मिली है कि सुमेरु इन्फ्रास्टक्चर भी जांच को ज्यादा लटकवाने मे, फाइलो और उनमे लिखे शब्दो को तीया पाँचा करने में जुटा हुआ है। इस समय मीडिया के भी गुब्बारे आकाश मे तेज़ी से उड़ रहे है विज्ञापनो की भरमार आपको आने वाले दिनो मे देखने को मिलेगी और इस पर सुमेरु का प्रबंधन प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के मार्केटिंग वालों को काफी ज़ोरदार ऑफर दे रहे है।

आपको ये भी बता दे की इस प्रोजेक्ट के बारे में लिखने वाले लोगो के खिलाफ मीडिया कर्मियों को लगाया गया है ताकि सच लिखने वालों को घेरा जा सके। खोजी नारद की पूरी टीम द्वारा आज आपको एक सबूत के तौर पर नदी के खसरे पर कैसे मसूरी देहारादून विकास प्राधिकरण ने नक्शा पास कर दिया इस यक्ष प्रश्न के जवाब में आप सभी लोगो को नदी के खसरे की भूमि की खतौनी और प्राधिकरण द्वारा पास मानचित्र की फोटो उपलब्ध कारवाई जा रही है। ऐसा नहीं है कि अधिकारियों को कुछ नहीं पर पता पर ऐसा कौन सी पट्टी उनकी आंखो मे बंधी हुई है कि वो देखी हुई मक्खी निगलने को तैयार है।

फिलहाल चौकाने वाली बात ये है की सुमेरु का प्रोजेक्ट शुरू हुआ 2013 मे और प्राधिकरण ने मानचित्र स्वीक्रत किया 2015 मे, तो क्या प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद मानचित्र स्वीक्रत किया गया ?

अगर ऐसा हुआ है तो प्राधिकरण को करोड़ो का घाटा पहुंचाने वाले अधिकारियों पर क्या कोई कार्यवाही होगी? क्यूकि आम पब्लिक जिसे प्राधिकरण के अधिकारी गुठली समझ चूस लेते है और इन जैसे बड़े मगरमच्छों पर कार्यवाही पर क्यो नजरे चुराते है ये भी एक बड़ा सवाल है?

अगर सुमेरु का मानचित्र कम्पाउंडिंग स्वीक्रत होता तो प्राधिकरण के खजाने मे काफी धनराशि जमा होती, तो किस अधिकारी ने ग्रुप हाउसिंग वालों को फायदा पहुंचाया ये भी जांच नहीं कार्यवाही का विषय होना चाहिए। आसन नदी की गोद के आस पास अवैध सभी ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट/प्लाटिंग और निर्माण कार्यो की तत्काल जांच कर नदी के रक्बे की भूमि को नदी को वापस किया जाना चाहिए क्यूकि माननीय उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा नदियो को मानव का दर्जा दिया गया है अगर उसके स्वरूप के साथ छेड़छाड़ होती है, तो छेड़छाड़ करने वाले व्यक्तियों और अधिकारियों पर कोर्ट द्वारा कार्यवाही होना तय है।

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khoji Narad Team

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