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ह्यूस्टन । अमेरिका के ह्यूस्टन में एक महिला ने बच्ची को जन्म देने के बाद उसे अपार्टमेंट परिसर के बाहर चीटिंयों के बीच डाल दिया. अधिकारियों ने बताया कि जब वे बच्ची के पास पहुंचे, उस समय वह चींटियों से ढकी हुई थी. महिला पर अपने बच्चे का परित्याग करने का आरोप लगाया गया है. हैरिस काउंटी के जेल रिकॉर्ड के अनुसार स्प्रिंग की 21 साल की सिडनी वोयताहचिक को मंगलवार को 20,000 डॉलर के बॉन्ड पर गिरफ्तार किया गया.  पड़ोसी ने अपार्टमेंट के बाहर बच्ची को देखाअपार्टमेंट में रहने वाले एक अन्य व्यक्ति ने पिछले गुरूवार को बच्ची को अपार्टमेंट के बाहर देखा. वहां से सिडनी के उस अपार्टमेंट तक खून के दाग पाए गए जहां उसने बच्ची को कुछ ही घंटों पहले जन्म दिया था. जांच के बाद सिडनी को गिरफ्तार कर लिया गया. बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया शेरिफ के डिप्टी किमबर्ली थॉमस के अनुसार मां ने अधिकारियों को बताया कि उसे पता नहीं था कि वह गर्भवती है और उसे डर था कि उसके और बच्ची के पिता के बीच यह नवजात शिशु आ जाएगा. बच्ची के पिता पर आरोप नहीं लगाए गए हैं. बच्ची को संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जज इस बात का फैसला करेंगे कि बच्ची का संरक्षण किसे सौंपा जाए.

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बर्न। द स्विस पीपल्स पार्टी (एसवीपी) ने अपनी सरकार के उस कदम का विरोध किया है जिसमें उसने भारत समेत 11 देशों को स्विजरलैंड के बैंक खातों के बारे में जानकारी देने का करार किया है। पार्टी का कहना है कि इससे बैंकों की साख कम होती तो दूसरे देशों में रह रहे नागरिकों को खतरे का सामना करना पड़ सकता है। स्विटजरलैंड की सरकार ने भारत के अलावा रूस, चीन, अर्जेटीना, ब्राजील, इंडोनेशिया, कोलंबिया, मैक्सिको, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका व संयुक्त अरब अमीरात के साथ समझौता किया था। इसके तहत फैसला किया गया था कि इन देशों के साथ ऑटोमेटिक एक्सचेंज ऑफ इनफॉरमेशन सिस्टम (एईओआइ) शुरू किया जाएगा। यह समझौता अगले साल से अमल में आएगा। इसके तहत बैंकों में जमा धन का ब्योरा संबंधित देशों को मिल सकेगा। भारत के लिए यह बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि कालेधन पर सरकार पहले ही बड़ा अभियान शुरू कर चुकी है। एसवीपी स्विजटलैंड की दक्षिण पंथी पार्टी मानी जाती है। उसका कहना है कि विश्व में हमारे बैंकों की साख है। लोग मानते हैं कि गोपनीयता के मामले में बैंक कोई समझौता नहीं करते, लेकिन जब सूचनाएं लीक होने लगेंगी तो स्विस बैंकों पर कोई भरोसा नहीं करेगा। हालांकि पार्टी का ये भी कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई व लोकतंत्र की बहाली के पैमाने पर आकलन के बाद जिस देश को कम से कम 45 अंक मिलते हैं, उसके साथ सरकार समझौते को अमल में न लाया जाए। पारदर्शिता में भारत का की 79वीं (176देशों में)रैंक है जबकि लोकतंत्र की बहाली में उसके सौ में से 77 अंक हैं। इस मामले में सबसे बुरा हाल चीन व रूस का है जबकि स्विटजरलैंड 96 व अमेरिका के 86 अंक हैं। उल्लेखनीय है कि बैंकों की गोपनीय जानकारी साझा न करने की बात स्विटजरलैंड के संविधान में दर्ज है, लेकिन इसके बावजूद वहां की सरकार ने ये समझौता किया है। ये कालेधन के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एक लड़ाई मानी जा रही है। माना जाता है कि दुनिया के बहुत से देशों के लोग अपने कालेधन को स्विस बैंकों में जमा कराने में रुचि लेते हैं। गोपनीयता इसकी प्रमुख वजह है।

 

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कर्नाटक में एक छात्र के 10वीं परीक्षा में 625 में से 624 नंबर आए थे और वह संयुक्‍त रूप से टॉपर रहा था. छात्र ने जानना चाहा कि उसका एक नंबर कहां कटा और उसने दोबारा कॉपी जांचने की अर्जी दी और इस बार उसके शत प्रतिशत नंबर आए. अब वह अकेले टॉपर हैं. इस छात्र का नाम मोहम्‍मद कैफ मुल्‍ला है और उसके विज्ञान को छोड़कर बाकी विषयों में पूरे नंबर आए थे.

बेलगाम की सेंट जेवियर हाई स्‍कूल का छात्र कैफ आईएएस बनना चाहता है. उसने 11वीं में विज्ञान वर्ग लिया है. उसके माता-पिता हारून रशीद मुल्‍ला और परवीन मुल्‍ला अध्‍यापक हैं. हारून उर्दू टीचर हैं, जबकि मां परवीन कन्‍नड़ पढ़ाती हैं.

कैफ ने टूसर्कल्‍स डॉट नेट नाम की वेबसाइट को बताया, 'मुझे 100 फीसदी नंबर लाने का भरोसा था, क्‍योंकि पेपर देने के बाद मैंने अपने जवाबों को टीचर्स, नोटबुक और मॉडल आंसर शीट से मिलाया था. किस्‍मत की बात है कि मेरे सारे जवाब सही रहे. इससे पहले मुझे 624 नंबर(99.86%) मिले थे, लेकिन पुनर्मूल्‍यांकन के बाद मेरा रिजल्‍ट उम्‍मीद के अनुसार रहा.'

उसके पिता ने बताया कि उनका बेटा सोशल मीडिया जैसी चीजों की ध्‍यान नहीं देता. उन्‍होंने बताया, 'कैफ काफी पढ़ाकू छात्र है जो अपना समय सोशल मीडिया आदि पर बर्बाद नहीं करता. मैं चाहता हूं कि वह उच्‍च स्‍तर पर सफलता हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करें.' हालांकि, कैफ पढ़ाई के अलावा बाकी गतिविधियों में भी शामिल रहता है और स्‍कूल में एनसीसी यूनिट का कमांडर है.

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