उत्तराखंड

खोजी नारद द्वारा विगत कई बार उत्तराखंड राज्य संपत्ति विभाग पर कई स्टोरी प्रकाशित की गयी है, इसी विभाग के अधिष्ठान तीन के अनुभाग अधिकारी रंजन क्वीरा जो सूचना के अधिकार में मांगी गयी सूचनाओ को ऐसे दबा कर खा जाते है की क्या कहने। इनके खुद के द्वारा सत्यापित कर दी गयी सूचनाओ को ये खुद ही भ्रामक बता देते है और बार-बार गलत जानकारी दे देते है।

खोजी नारद के संपादक द्वारा जब विभाग 16 जून 2020 को सूचना का अधिकार लगाया जाता है और उसमे मुख्यालय से बाहर तैनात विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियो के आवास से संबन्धित सूचना मांगी जाती है तो वो निश्चित समय पर सूचना प्रदान नहीं करते है। जब खोजी नारद के संपादक द्वारा विभाग को इस प्रकरण के संदर्भ में प्रत्यावेदन दिया जाता है तो इनके द्वारा 23 सितंबर 2020 को सूचना संकलित कर भेजी जाती है।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियो से किराया वसूलने को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश को लेकर, सरकार सुप्रीम कोर्ट में राहत पाने को लेकर जद्दोजहद कर रही है वही राज्य संपत्ति विभाग मुख्यालय से बाहर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियो के आवास खाली करवाने और उनसे वसूली तक नहीं कर पा रहा है। सूचना का अधिकार लगाने और फिर प्रत्यावेदन देने के बाद विभाग के वरिष्ठ व्यवस्थाधिकारी आवास आलोक सिंह चौहान 15 सितंबर 2020 को एक आवास से बेदखली और मानक किराए से वसूली की प्रक्रिया की पत्रावली चलाते है, क्या विभाग के कार्मिक पूर्व मुख्यमंत्रियो से ऊंचे ओहदे पर है?

इनसे आवास खाली करवाने है देखे पत्र लाल घेरे में.......

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वही एक ओर राज्य संपत्ति अधिष्ठान के रंजन क्वीरा द्वारा सूचना के अधिकार में जो सत्यापित छायाप्रती उपलब्ध कराई जाती है उसे बाद में क्वीरा जी भ्रामक बता देते है।

रंजन क्वीरा का पत्र देखिये लाल मार्क के घेरे में.....

 

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राज्य संपत्ति विभाग में कई कार्मिको और अधिकारियों की शैक्षिक योग्यताओ को लेकर खोजी नारद द्वारा विभाग के सचिव आर के सुधांशु को प्रत्यावेदन भी दिया गया पर उस पर कार्यवाई क्या हुई ये फाइलों की गर्त में है। अब सवाल ये है कि अधिष्ठान के अनुभाग अधिकारी रंजन क्वीरा जब चाहे तब किसी भी कागज को झूठा भ्रामक और टंकण त्रुटि बता सकते है क्या उनकी भी शैक्षिक योग्यताओ पर सवाल खड़ा किया जा सकता है? इनकी तरह हमारे दिमाग की ट्यूबलाइट ऑफ नहीं है।

इस पत्र को भ्रामक बता रहे है रंजन क्वीरा पत्र देखिये.........

 

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मेरे कुछ सवाल है क्या विभाग के सचिव इस पर कोई कार्यवाई करेंगे.....

1-  क्या  प्रधानमंत्री जी को सोशल मीडिया पर सैकड़ो बार अपशब्द लिखने वाले को माफ कर देना चाहिए जबकि वो आपके राज्य संपत्ति विभाग का कार्मिक हो?

2-  क्या राज्य मुख्यालय से बाहर तैनात कार्मिक एवं अधिकारियों के आवास को कब तक खाली करवाना चाहिए? क्या आपका विभाग नियमावली से कार्य कर रहा है?

 

विभागीय नियमावली ....

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3-  क्या आपके विभाग का कोई भी अधिकारी एवं कार्मिक वर्षो से एक ही जगह तैनात रह सकता

4 है, क्या आपके विभाग में स्थानांतरण नियमावली नहीं है?

5-  क्या आपके विभाग का अधिकारी मुन्ना प्रसाद अपने पुत्र शिवांकू कुमार को लाभ देने के लिए राज्य अतिथि गृह के नाम पर स्थाई निवास बना सकता है?

6-  क्या आपके विभाग में कार्मिको/अधिकारियों की शैक्षिक योग्यताओ की सत्यता का परीक्षण नहीं होता है?

इन सभी सवालो पर अभी एक प्रश्नचिन्ह है सुधांशु जी, मेरा सवाल आपसे है क्या ये प्रश्नचिन्ह हट सकते है।

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पिछली स्टोरी का शीर्षक था फर्जी कागजों के सहारे मुन्ना भाई की 'मतस्य' विभाग में शॉट सर्किट योजना”। अब खोजी नारद के पास कुछ ऐसे दस्तावेज़ सूचना के अधिकार के माध्यम से मिले है जिसमे मतस्य विभाग की मोबाइल फिश आउटलेट योजना ही सवालो के घेरे में है। राज्य अतिथि गृह सर्किट हाउस में बेयरर के पद पर तैनात दिलवीर सिंह को मतस्य विभाग देहारादून के जनपद प्रभारी विनोद कुमार यादव ने 14 अक्टूबर को 2019 को मोबाइल फिश आउटलेट आवंटित करने के लिए निदेशक मतस्य को पत्र लिख अपनी रिपोर्ट सौप दी थी।

मतस्य विभाग द्वारा सर्किट हाउस में तैनात एक अधिकारी के बेटे शिवांकू कुमार को और एक किचन हेल्पर दिलवीर सिंह को ब्लू रेवोल्यूशन योजना के अंतर्गत मोबाइल फिश आउटलेट आवंटित करना योजना पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

अगर शिवांकू कुमार के दस्तावेज़ आप पहली बार देख ले, जो विभाग द्वारा हमे सूचना के अधिकार के माध्यम से मिले है तो उसमें ही शिवांकू कुमार संदेह के घेरे है क्यूकि उत्तर प्रदेश में ही उनका जन्म हुआ और शिक्षा उसने वही से प्राप्त की है एवं उन्होने 2015 में निवास प्रमाण पत्र वही से बनाया हुआ है तो उसने कैसे 2016 मे वो उत्तराखंड से स्थायी निवास बना लिया?

सर्किट हाउस के दूसरे कर्मचारी दिलवीर सिंह जब राज्य अतिथि गृह सर्किट हाउस एनेक्सी में काफी सालो से आउटसोर्स पर कार्य कर रहा है और वर्तमान में वो पीआरडी से किचन हेल्पर के पद पर कार्य कर रहा है, तो उसने क्यो मतस्य विभाग को लिखे पत्र में स्वरोजगार करने के लिए मोबाइल फिश आउटलेट की स्थापना के लिए आवेदन किया?

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सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार दिलवीर सिंह के नाम और कागज को कोई और इस्तेमाल कर रहा है जैसे लोग बेनामी संपत्ति खरीदने में करते है और अगर ऐसा नहीं है, तो दिलवीर सिंह पूर्व से अतिथि गृह में कार्य कर रहे है तो उन्हे स्वरोजगार करने के लिए मोबाइल फिश आउटलेट मतस्य विभाग से क्यो लिया? अब या वो अपना स्वरोजगार करेंगे या फिर अपनी नौकरी ? क्यूकि एक व्यक्ति दो जगह कार्य कैसे करेगा। क्या राज्य संपत्ति विभाग को उनकी सेवाएँ समाप्त कर देनी चाहिए? या दिलवीर को अपना वाहन मतस्य विभाग में सरेंडर कर देना चाहिए? क्यूकि जब आप सरकारी संस्थान में आउटसोर्स के माध्यम से कार्य कर रहे है, तो बेरोजगारो के रोजगार के लिए बनी योजना में आप सरकारी विभाग को गुमराह कर उनके हक में डाँका डाल रहे है। कहि सरकार का डंडा चल गया तो एक कहावत चरितार्थ हो जाएगी:-

                 संसारी से प्रीतड़ी, सरे न एको काम

                 दुविधा में दोनों गए, माया मिली ना राम

अब सर्किट हाउस एनेक्सी में ही क्यो फ्राडो का शॉट सर्किट हो रहा है कहीं इसके पीछे किसी मुन्ना भाई का करेक्टर तो स्थापित नहीं है?dilveer2.jpg

जब खोजी नारद द्वारा मुन्ना भाई टाइप करेक्टर के बारे में जांच पड़ताल की गयी तो कई और साक्ष्य हाथ लगे। ये सभी साक्ष्य राज्य संपत्ति विभाग से जुड़े है सूचना के अधिकार के माध्यम से हमे पता चला कि उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड आए कर्मचारियो के बंटवारे में ये मुन्ना प्रसाद इस राज्य को, कोर्ट के आदेश पर यहाँ भेजे गए है और इनका ही पुत्र शिवांकू कुमार है।

 

मुन्ना प्रसाद के आवंटन संबंधी उत्तर प्रदेश के राज्य संपत्ति विभाग का पत्र

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मुन्ना प्रसाद के अंतिम आवंटन पत्र को जब हमने बारीकी से देखा तो एक बड़ा खुलासा हुआ कि उस आवंटन पत्र में इनकी पत्रावली खुली ही नहीं, सिर्फ इनकी सिर्फ पासबुक उत्तर प्रदेश शासन द्वारा भेजी गयी तो क्या इनकी पत्रावली उत्तर प्रदेश में खुली ही नहीं? ये हम नहीं कह रहे है ये विभाग के कागज बोल रहे है। इनकी पत्रावली उत्तराखंड में नयी खोली गयी। जब मुन्ना प्रसाद की नई पत्रावली उत्तराखंड में खोली गयी तो हमारे मन में सवाल कौंधा कि जब उत्तर प्रदेश में इनकी पत्रावली खुली थी, तो उत्तराखंड में इनकी नयी पत्रावली क्यो खोली गयी?

शेष भाग जल्द।

“क्यो हुई मुन्ना की पत्रावली मिस्टर इंडिया!”

 

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मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिह रावत ने शनिवार को जनपद पौड़ी में विकास भवन सभागार कक्ष के नवीनकरण कार्य का लोकार्पण किया। इसके पश्चात् उन्होंने उद्यान, कृषि, मत्स्य, पर्यटन, पेयजल, सड़क, पशुपालन, सिचाई, स्वास्थ्य आदि विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ विभागवार जनपद में हुए विकास कार्यो की समीक्षा भी की। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी श्री आशीष भटगांई ने प्रोजेक्टर के माध्यम से विकास कार्यो की जानकारी दी। संबंधित अधिकारी ने ल्वाली झील के कार्य दिसम्बर माह तक पूर्ण होने की बात कही। जल जीवन योजना के तहत प्रत्येक दिन की लक्ष्य निर्धारित कर, प्रतिदिन के कार्य की समीक्षा करेंगे। राज्य स्तर पर 3000 कनेक्शन की प्रतिदिन लक्ष्य रहेगा, जिसकी स्वयं मॉनेट्रिंग करने की बात कही। पारंपरिक भवन शैली के कास्त को लेकर उन्होने कहा कि सरकारी विभागों में निर्माण कार्य के 20 प्रतिशत पत्थरों के कार्य होगें। इससे इस शिल्प से जुडे़ लोगों को काम मिलने के साथ यह कला जीवंत रहेगी। नगरी क्षेत्र में पहाडी शैली के भवन बनाने पर एक मंजिला की नक्शा नि:शुल्क दी जायेगी।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने समीक्षा के दौरान कोविड-19 के दृष्टिगत गाईड लाईन तथा मास्क पहनना व सामाजिक दूरी का अनुपालन हेतु जागरूकता लाने को कहा। जबकि क्षे़त्र के अस्पतालों में तैनात डाक्टर तैनाती स्थल पर कार्य/निवास कर रहे है या नहीं इस हेतु जिलाधिकारी श्री धीराज सिह गर्ब्याल को भौतिक निरीक्षण के निर्देश दिये। उद्यान विभाग की बागवानी के समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने क्रमवार जनपद में की जा रही कार्यो की विस्तार पूवर्क जानकारी दी। उन्होने बताया कि जनपद स्तर पर प्रदेश का पहला फार्म होगा जहां से प्रति वर्ष 60 से 70 हजार पौधे किसान को उपलब्ध कराये जायेगे। हॉलेण्ड से रूटस्टाक मंगाकर पौधे तैयार किये जा रहे हैं, जबकि हिमाचल से बागवानी विशेषज्ञों द्वारा क्षेत्र में सेब के बागवानी वाले स्थलों का निरीक्षण कर, कास्तकारों को प्रशिक्षण दिया गया है। पर्यटन विभाग की ओर से बासा होमस्टे, सतपुली एवं नयार नदी तथा कण्डोलिया पार्क में की जा रही कार्य की जानकारी देते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि सतपुली में बासा ऐग्लिंग कैंप कम्यूनिटी बेस पर तैयार किया जा रहा है, जो इस अक्टूबर तक तैयार हो कर कम्युनिटी को दी जायेगी। वहीं उन्होने बताया कि कण्डोलिया में वृद्ध से लेकर बच्चों के लिए मनोरंजन हेतु पार्क तैयार की जा रही है। जो कि प्रदेश का पहला पार्क होगा जहां योगा से लेकर एमपी थिएटर, बच्चों के मनोरंजन पार्क, कोटी बनास शिल्प कार्यो की तर्ज पर रेस्टोरेन्ट बनाये जा रहे हैं। पहाडी शिल्प शैली से बासा टू के निमार्ण कराये जा रहे है। जिस पर मुख्यमंत्री ने पहाडी शिल्प शैली को जीवंत रखने हेतु विभागों में 20 प्रतिशत निर्माण कार्य पत्थर पर आधारित कराने की बात कही। पशुपालन विभाग की समीक्षा के दौरान उन्होने पशुओं की स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण पर ध्यान रखने के निर्देश दिये। स्थानीय नश्ले भी बचा कर रखनी होंगी। पशुओं की स्थानीय प्रजातियों की अपनी महत्ता है।

मुर्गी पालन/पॉट्री फार्म को लेकर उन्होने जिलाधिकारी के प्लान को गम्भीरता से जानकारी लेते हुए कहा कि ऐसे कार्य करें जिससे जनपद के मार्केट को निरंतर आपूर्ति होती रहे। जबकि मौन पालन को भी विकसित करने के निर्देश दिये। वन विभाग के संबंधित अधिकारी से कैंपा के तहत विकास कार्यो की जानकारी ली। संबंधित अधिकारी ने कार्यो में 30 फीसदी ही खर्च होने की बात कही। जिस पर मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि कैंपा के तहत कार्यो को बढाते हुए 70 फीसदी तक धनराशि खर्च करें। सड़क की समीक्षा के दौरान उन्होने लम्बे समय से स्वीकृत सड़क की वस्तुस्थिति की जानकारी ली। साथ ही अवरूध सडक को त्वरित खोलने की के निर्देश दिये।


बैठक में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत, पौड़ी विधायक मुकेश कोली, जिलाध्यक्ष भाजपा संपत सिह रावत, उपाध्यक्ष सिचाई अतर सिह असवाल, उपाध्यक्ष सहकारिता मातबर सिह रावत सहित विभिन्न अधिकारी मौजूद थे।

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मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को घंडियाल, पौड़ी गढ़वाल में टी. एन. वी. एस. ई ग्रुप द्वारा उत्पादित पहाड़ी उत्पादों के प्लांटेशन एवं पायलेट प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने किनवा की बुआई एवं स्वावलंबन स्वयं सहायता के उत्पादों का भी निरीक्षण किया।


मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र ने अपने संबोधन में कहा कि सम्पूर्ण विश्व कोविड महामारी के दौर से गुजर रहा है। इस महामारी से बचाव के लिए हमें बहुत सतर्कता बरतने की जरूरत है। कोविड से बचाव के लिए जो भी गाईडलाइन जारी हो रही है, उसका सबको पूरा पालन करना होगा। इस बीमारी से बचाव के लिए फिजिकल डिस्टेन्स एवं मास्क का प्रयोग बहुत जरूरी है। आज हमारे समकक्ष आपदा को अवसर में बदलने की भी बड़ी चुनौती है। आज उत्तराखंड में अनेक नौजवान कठिन परिस्थितियों के कारण घर की ओर वापस लौटे हैं। उत्तराखंड के युवाओं को स्वरोजगार के लिए पर्याप्त अवसर मिले, इसके लिए राज्य में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की गई है।

इस योजना में लगभग सभी प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है। पौड़ी में युवाओं द्वारा सामूहिक प्रयासों से सराहनीय कार्य किया जा रहा है। अन्य लोगों को भी इससे प्रेरणा लेकर कार्य करने होंगे। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। हमें स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ ही उनकी पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग पर भी विशेष ध्यान देना होगा। देवभूमि उत्तराखंड में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं भी हैं। उत्तराखंड विभिन्न प्रकार की जैव विविधता वाला राज्य है। हिमालय की जड़ी बूटियों के उत्पादों से हम हिमालयी ब्रांडो की मार्केटिंग कर सकते हैं।


मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र ने कहा कि राज्य सरकार ने राज्य में ग्रोथ सेंटर की शुरुआत की है, प्रदेश में 100 से अधिक ग्रोथ सेंटर प्रारंभ हो चुके हैं। सभी न्याय पंचायतों में एक-एक ग्रोथ सेंटर बनाए जा रहे हैं। सभी ग्रोथ सेंटरों का कॉन्सेप्ट अलग होगा। उन्होंने कहा कि वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली योजना के तहत बस खरीदने के लिए 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। इन बसों का रोडवेज से अनुबंध करने की व्यवस्था भी की गई है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में पर्यटन के तहत हम 10 हजार मोटर बाईक देंगे। इसमें दो साल का ब्याज राज्य सरकार देगी। 25-25 किलोवाट के 10 हजार छोटे सोलर पावर प्रोजेक्ट की योजना मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत लाई गई है।

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