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मतस्य विभाग की मोबाइल फिश आउटलेट योजना की शुरुआत उत्तराखंड में बेरोजगारो को रोजगार मुहैया करवाने के लिए हुयी थी। अब यह योजना सिर्फ मुन्ना और उनके सर्किटों की चौखट पर ही दिख रही है।

आप सभी पाठको को पूरे मामले से अवगत कराते है, मैंने अपनी स्टोरी की हेडलाइन में मुन्ना भाई और सर्किट का जिक्र किया है, अब आप किसी फिल्म के करेक्टर में मत चले जाना, क्यूकि मतस्य विभाग में इस जालसाज़ी के मास्टरमाइंड मुन्ना और सर्किट का बहुत बड़ा नाता है जिसको मै स्टोरी के अंत में आपको बताऊंगा।

मतस्य विभाग की मोबाइल फिश आउटलेट योजना में रोजगार हेतु एक बेरोजगार अभ्यर्थी शिवांकू कुमार पुत्र मुन्ना प्रसाद ने आवेदन किया और उनको इस योजना में विभाग द्वारा उपयुक्त पाते हुये उनके सारे दस्तावेज़ परीक्षण करने के बाद एक मोबाइल फिश आउटलेट वैन मार्जिन मनी जमा कराने के बाद दे दी जाती है।

जब खोजी नारद के द्वारा सूचना के अधिकार के अंतर्गत सारे दस्तावेज़ लिए गए तो, मतस्य विभाग की मोबाइल फिश आउटलेट योजना की सारी पोल पट्टी की परते खुलकर सामने आ गई।

                                (दस्तावेज़ छायाचित्र में देखे)

 

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शिवांकू कुमार द्वारा जो दस्तावेज़ विभाग को दिये गए उन दस्तावेज़ो में इनके दो निवास प्रमाण पत्र है, एक उत्तर प्रदेश से 2015 बना है और दूसरा स्थायी निवास 2016 में उत्तराखंड राज्य में बना हुआ है। इन महाशय का जाति प्रमाण पत्र भी उत्तर प्रदेश से 2015 में बना हुआ है और ये रहने वाले भी उत्तर प्रदेश के है।

अब सवाल ये है कि शिवांकू कुमार के दो निवास प्रमाण पत्र कैसे हो सकते है? एक राज्य से निवास प्रमाण पत्र बनने के बाद दूसरे राज्य से स्थायी निवास प्रमाण पत्र 15 साल बाद ही बन सकता है और इस प्रमाण पत्र को बनवाने के लिए आवेदानकर्ता को शपथ पत्र भी देना होता है कि उसने कही कोई अन्य राज्य से प्रमाण पत्र नहीं बनवाया है। तो क्या शिवांकू कुमार ने उत्तराखंड राज्य में फर्जी दस्तावेज़ो के आधार पर स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनवाया? सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेज़ तो यही दर्शा रहे है।

शिवांकू कुमार के द्वारा जो मतस्य विभाग में मोबाइल फिश आउटलेट के लिए जो आवेदन किया तो उसमें उनका स्थायी पता राज्य अतिथि गृह सर्किट हाउस एनेक्सी है और उत्तराखंड राज्य से बने स्थायी निवास प्रमाण पत्र में भी उनका पता स्टेट गेस्ट हाउस सर्किट हाउस एनेक्सी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उत्तराखंड राज्य का अतिथि गृह सर्किट हाउस किसी का स्थायी पता कैसे हो सकता है?

जब खोजी नारद द्वारा दस्तावेज़ो की पूरी जांच की गयी तो मतस्य विभाग की उत्तराखंड के बेरोजगार निवासियों के लिए मोबाइल फिश आउटलेट योजना की परते खुलने लगी। शिवांकू कुमार के आवेदन पत्र पर जो उनके पिता का नाम मुन्ना प्रसाद लिखा था, जब खोजी नारद की टीम द्वारा और पड़ताल की गयी तो पता चला की मुन्ना प्रसाद राज्य संपत्ति विभाग में सर्किट हाउस एनेक्सी में व्यवस्थाधिकारी के पद पर तैनात है और जब हमारी टीम के संवाददाता छानबीन करने सर्किट हाउस एनेक्सी पहुंचे तो पता चला की वहाँ पर मोबाइल फिश आउटलेट की दो गाडियाँ वहाँ खड़ी मिली। हमारा माथा ठनका की ये क्या फर्जीबाड़ा है, जब शिवांकू कुमार को मतस्य विभाग से मोबाइल फिश आउटलेट की स्थापना हेतु एक गाड़ी आवंटित की गयी तो ये दो गाड़ी कैसे?

अब हमारे संवाददाता ने जब विभाग के दस्तावेज़ और खंगाले तो उनमे एक नाम और सामने आया दिलवीर सिंह पुत्र स्व॰ सूरत सिंह, जब इनके बारे में पता किया तो हमारी आंखे अपना दायरा फाड़ कर बाहर निकलने के लिए बाट जोहने लगी।

दिलवीर सिंह बारे में जानकारी करने पर पता चला की ये भी सर्किट हाउस एनेक्सी में बियरर के पद पर तैनात है। बस फिर क्या था हमने सूचना के अधिकार का इस्तेमाल किया और जब जबाब हमे प्राप्त हुआ तो हम और चौक गए क्यूकि हमे सूचना प्रदान करने लोक सूचना अधिकारी खुद मुन्ना प्रसाद  थे।

 

                   हमारे सवाल                               लोक सूचना अधिकारी के जबाब

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उन्होने जो सूचना हमे प्रदान की उसमे उन्होने दिलवीर सिंह के बारे में तो सूचना दी कि वह वियरर के पद पर तैनात है पर राज्य अतिथि गृह में स्थायी तौर पर रहने वाले निवासियों के संदर्भ के विषय पर उन्होने उत्तर में लिखा कि सूचना शून्य है।

अब सवाल ये उठता है कि जब सर्किट हाउस एनेक्सी में दिलवीर सिंह बियरर के पद पर कार्य कर रहा है तो मतस्य विभाग की बेरोजगारो के लिए योजना का लाभ वो क्यो ले रहा है ? और जब कोई स्थायी निवासी सर्किट हाउस में निवास नहीं करता है, तो शिवांकू कुमार नें अपने आवेदन पत्र में अपना स्थायी पता सर्किट हाउस क्यो दर्शाया और स्थायी निवास प्रमाण पर भी अपना पता उक्त क्यो दर्शाया? कही शिवांकू कुमार और उसके पिता मुन्ना प्रसाद ने मतस्य विभाग और सर्किट हाउस एनेक्सी (जो इस राज्य की संपत्ति है) का जालसाज़ी की नियत से कूटरचना करके और कूटरचित दस्तावेज़ बनाकर, अपने निजी फायदे के लिए सरकारी पते और अपने पद का भरपूर इस्तेमाल तो नहीं किया?

सर्किट हाउस एनेक्सी के मुख्य व्यवस्थाधिकारी श्री रविन्द्रा पाण्डेय से जब दूरभाष से बात की गयी और उनको मुन्ना प्रसाद द्वारा राज्य की संपत्ति का अपने निजहित के लिए कूटरचना करने के दस्तावेज़ खोजी नारद के द्वारा उपलब्ध करवाए गए, तो उन्होने कहा कि जीरो टॉलरेंस की सरकार में ऐसा बिलकुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उनके द्वारा खुद शासन के उच्च अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया जाएगा और जांच कर दोषियो पर कठोर कानूनी कार्यवाई की जाएगी।

इस स्टोरी का शेष और पूरा भाग जल्द।

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