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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के खिलाफ बहुत सारी खबरें, आपको उनके शपथ लेने के बाद देखने को मिली होंगी। उत्तराखंड का दुर्भाग्य है कि की शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री के हटने की चर्चा जोर पकड़ लेती हैं। एक ऐसा तपका है जो हमेशा से उत्तराखंड की प्रति नकारात्मक रुख अपनाता रहा है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के खिलाफ विगत कुछ माह से सोशल मीडिया में एवं न्यूज़ पोर्टल पत्रिकाओं के जरिये, गाहे बगाहे त्रिवेंद्र सिंह रावत को घेरा जाता रहा है इसी क्रम में खोजी नारद आज कुछ खुलासा कर रहा है कि कितनी हैरान गलियें है और परेशान मोहल्ले हैं जो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के खिलाफ सिर्फ सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास और हो-हल्ला कर अपने मंसूबों को अंजाम देने में लगे हैं।

 

मुख्यमंत्री के सलाहकार ऐसे हैं जो खुद ही मुख्यमंत्री के खिलाफ खबरें प्लांट करवाते हैं और उनको मैनेज करने का खेल करते हैं यह सारा नंबर गेम है, ऐसा लोगों को लगता है पर इसके पीछे एक बहुत बड़ी रणनीति काम कर रही है। जिसके तहत कुछ न्यूज़ पोर्टल जो उत्तराखंड में बदनामी का दामन थामे हुए हैं उनको ठेके दिए जाते हैं उत्तराखंड के हाकिम के खिलाफ खबरे सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए और फिर उन्ही खबरों को रोकने के लिए, उनको मैनेज किया जाता है। “मैंनेज” इसका मतलब आप समझ रहे होंगे कि मैं क्या कहना चाह रहा हूं।

एक सा न्यूज़ पोर्टल जो हमेशा से सवालों के घेरे में रहा है जिसका काम सिर्फ और सिर्फ ब्लैक मेलिंग रहा हो अब वह मुख्यमंत्री के पक्ष में लिखेंगे क्योंकि डील हो चुकी है। अब अगर पोर्टल वाले कहेंगे कि डील नहीं हुई है और हम ऐसे नहीं हैं तो उसके जवाब में उनकी पुरानी करतुतो की क्लिप आज तक यू ट्यूब पर इनको तमाचे मार रही है।

 

सोशल मीडिया पर खबरे पोस्ट करने वाले पोर्टल द्वारा पूर्व के वर्षो में कई साजिशों को अंजाम दिया गया है एक मामला कुछ यू था कि किसी पढे लिखे व्यक्ति को चंद पैसो की खातिर उसका कार्य करने से रोकने के लिए उसके अधिकारी आईएएस दोस्त द्वारा इस पोर्टल के संपादक को ठेका दिया गया था। ताकि तात्कालिक मुख्यमंत्री को भी खुश किया जा सके और एक करीबी दोस्त को छुरा घोपकर मरहम भी लगाया जा सके, ताकि दोस्त को ये लगे कि मेरा आईएएस अधिकारी दोस्त कितना ख्याल रखता है मेरा। तब उस संपादक के मुखबिरो ने खोजी नारद को भी मुखबिरी की और उसका परिणाम खबर और विडियो के रूप में आपके सामने पूर्व में आ चुका है।

 

अब एक न्यूज़ पोर्टल द्वारा सोशल मीडिया पर खबरे मुख्यमंत्री के पक्ष में लिखी जाएंगी क्योंकि डील हो चुकी है खबर  लिखवाने वाला अब मैनेज का खेल कर रहा है। इसे तो यही कहा जाएगा कि “चिराग तले अंधेरा”, मुख्यमंत्री जैकेट बदलते हैं और यह खबर 1 घंटे बाद सोशल मीडिया पर स पोर्टल के द्वारा पोस्ट करी जाती है इसे क्या कहा जायेगा?

 

जीरो टालरेंस की सरकार का विजन बिलकुल साफ है, उसके लिए मुख्यमंत्री जी मैं तो आपसे यह कहना चाह रहा हूं कि आपको अपने आसपास साफ सफाई कर लेनी चाहिए क्योंकि अगर गंदे लोग आस पास रहेंगे तो वह अच्छे लोगों को भी गंदा कर देंगे। क्योकि एक अदना सा सलाहकार इतना सब कुछ कर गया और आपको हवा भी नहीं लगी, क्योंकि आप भोले हैं।

चाहे उत्तरा बहुगुणा पंत वाला प्रकरण हो या उस पहाड़ी गीत वाला, सबसे ज्यादा थू-थू सरकार की करने में किसकी भूमिका थी? आप खुद में सक्षम में बस इनके घेरे से निकल कर जो आप कार्य कर रहे है वोकीजिये। वरना ये आपके हर अच्छे कार्य को पलीता बनाकर उसमे खुद ही आग लगाने का कार्य करेंगे और खुद यही प्रदर्शित करेंगे कि मै तो पानी समझ कर बाल्टी लाया था आग पर डालने के लिए, मुझे क्या पता उसमे पेट्रोल था। अप्रिय सलाहकार को एक कवि द्वारा लिखी गयी कुछ पंक्ति उनके मुँह पर फेक रहा हूँ:

प्रतिमाओं में पूजा उलझी
विधियों में उलझा भक्ति योग
सच्चे मन से षड्यंत्र रचे
झूठे मन से सच के प्रयोग
जो प्रश्नों से ढह जाए वो
किरदार बना कर क्या पाया?
जो शिलालेख बनता उसको
अख़बार बना कर क्या पाया

 

त्रिवेन्द्र जी आप अच्छा विजन और जीरो टालरेंस के साथ आगे बढ़े उत्तराखंड के विकास के लिए कुछ ऐसे लोगों से जुड़िए और जोड़िये जो निष्पक्ष होकर इमानदारी से उत्तराखंड के लिए कुछ करना चाहते हो वरना ऐसे लोग और ऐसे सलाहकारो ने तो पूर्व की सरकारों की भी लुटिया डुबो दी थी

 

 

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