आज बड़े दिनों बाद कुछ लिख रहा हूँ क्योंकि कॅरोना वायरस के चलते इस लॉकडाउन में मेरी उंगली भी लॉक कर दी गयी थी। कल
 
कुछ पुराने जान पहचान वाले छायाचित्र में फिर से दिख गए। बिलकुल हम चार धारावाहिक के किरदार जैसे। ये लोग है जो कल
 
पपीहा बन कजरारे बादलों से बरसने की गुहार कर रहे थे। 
ये अलग बात है कि:-
पपीहा के चिल्लाने से उसे बादल नही मिलता
हमारा प्यार भी मोबाइल से दर-दर ठोकरे खाता 
कभी नंबर नही मिलता
 
कहीं सिग्नल नही मिलता
पर ऐसे पपीहे फ़ोटो में बादलों से गुहार लगाते जरूर दिख जाते है। मैंने भी अब शिवजी को चढ़ाने वाले धतुरे का स्वाद चख लिया है
 
अब कोई और स्वाद जुबां पर नही है।
एक दीगर बात थी पर क्या फर्क पड़ता है कि इन पपीहो के नेता को पूर्व मे आर्थिक सहायता हेतु प्राप्त धनराशि को पपीहा सबसे
 
पहले स्वयं पर खर्च करेगा। क्योकि वो भी तो वही ठहरा। ये अलग बात है कि उसके चिल्लाने पर अब बादल नही आते।

 

 

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