उत्तराखंड

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भारत सरकार के निर्देश पर 29 वें राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह के अंतर्गत आज दिनांक 27 अप्रैल 2018 को देहरादून में परिवहन विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा रैली का आयोजन किया गया

इस अवसर पर सचिव एवं आयुक्त परिवहन डी. सेंथिल पंडियन द्वारा रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया उनके द्वारा स्कूली बच्चों विभिन्न परिवहन व्यवसाइयों का आह्वान किया गया कि सड़क सुरक्षा नियम अपनाएं और अपने जीवन को सुरक्षित बनाएं

रैली के अवसर पर जिलाधिकारी देहरादून वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निवेदिता कुकरेती कुमार, देहरादून अपर परिवहन आयुक्त संभागीय परिवहन अधिकारी देहरादून एवं परिवहन विभाग के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित हुए, इस रैली में 500 छात्र छात्राओ एवं 250 नागरिकों ने हिस्सा लिया।

इसके अतिरिक्त आज प्रदेश भर में सभी स्कूलों में अध्यापको एवं स्कूली छात्र छात्राओं द्वारा सड़क सुरक्षा की शपथ ग्रहण की गई इस जागरूकता रैली के सफल आयोजन में अपर परिवहन आयुक्त सुनीता सिंह, आरटीओ सुधांशु गर्ग, एआरटीओ अरविंद पांडे, सभी ने अपना सहयोग किया।

 

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कभी कभी खोजी नारद के पाठक सोचते होंगे की ये कैसे-कैसे शब्द है जिनको समझने के लिए दिमागी कसरत करनी पड़ती है। खोजी नारद आप सभी की दिमागी इंद्रियो को कसरत कराता रहता है।

तुर्रा-ए-पुर-पेच-ओ-खम से एक गिल्ली डंडे का मैच हुआ, जिसमे करोड़ो रुपये अला..बला विभागो का खर्च हुआ जैसे खली के प्रोग्राम में करोड़ो की बलि ली गयी थी।

अबकी बार कंपनी के मालिक का खून जंवा था तो तुर्रा ए पुर पेच ओ खम का सहारा लिया गया और प्रोग्राम का सफल आयोजन हुआ।

विभागो के कई भाई लोगो ने तुर्रा-ए-पुर-पेच-ओ-खम का काफी लुत्फ लिया और मौज बहार भी बटोर ली। इन विभागो के भाई लोगो के पास तो विभागीय भुगतान करने के लिए भी कौड़ी कौड़ी का टोटा है, अब गिल्ली डंडे के लिए कौन सा पेड़ हिलाकर निकाल दिये समझ मे नहीं आया पर ये जरूर पता लगा सबको तुर्रा-ए-पुर-पेच-ओ-खम का कंधा दिया गया था, कुबेर की चाबी खोलने के लिए।

अब सवाल ये है कि इतना सब किस लिए अरे भाई लोगो बे...काक का सहारा ले लेते। पूर्व वाले साहब ने भी सहयोग किया खूब पर उनको तो ना सिरा पता चला ना छोर, अब अंदर से आवाज आ रही है उनके,

                      खुदा के वास्ते पर्दा ना उठा काबे का जालिम

                   कही ऐसा न हो यंहा भी कि वही काफ़िर सनम निकले

अब आप सभी अपने दिमाग को जोरदार कसरत करवाए और जब तुर्रा-ए-पुर-पेच-ओ-खम का पता चले तो फ़ेस....पर जरूर बके। ताकि विभागो के भाई लोग सतर्क हो जाए।

wine.jpgआबकारी विभाग की टीआरपी इन दिनो टॉप पर है वजह है ओवर रेटिंग का खेल, राज्य के कई जिलो मे आबकारी विभाग ओवर रेटिंग का डमरू बजा रहा है। हर दिन लाखो की शराब की बिक्री पर जनता से ओवर रेटिंग का मोटा रुपया किसकी जेब में जा रहा है। देहारादून जिले का हाल तो और भी सुभान है, यहाँ जिले में तैनात बड़के भैया के पास तो किसी के सवाल का जबाब देने तक की फुर्सत नहीं है। वो तो सुपरमैन की भूमिका में आजकल दिख रहे है, जगह जगह छापेमारी हो रही है लाखो के माल पकड़े जा रहे है पर बड़के भैया सालभर तक आंख कान की मालिश मे व्यस्त थे। अब अचानक से मालिश के बाद सुपरमैन की भूमिका में है। आबकारी मंत्री के पास किसी भी बात का जबाब नहीं है, क्या उनकी शह पर बड़के भैया सुपरमैन की भूमिका मे है या फिर मंत्री जी को विभाग के कार्यो में दिलचस्पी नहीं है?

इस समय आबकारी मंत्री क्यो मनमोहन सिंह बने हुये है? विभाग के 3 से 4 सुपरमैनो की हरकतों से मंत्री जी की बैडमैन छवि बनती दिख रही है?

क्या उत्तराखंड की सरकार जीरो टोंलरेन्स की है या फिर सवालो के जबाबों के टोंलरेन्स की है?

अगर इस विभाग के मंत्री जी ने जल्द ही अपनी चुप्पी ना तोड़ी तो उनपर प्रश्न चिन्ह लगना तय है।

 

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उत्तराखंड की राजधानी देहारादून के RTO ऑफिस में अधिकारी और कर्मचारी सभी बड़ी बेबाकी और कर्मठता से कार्य करते है वो भी सिर्फ धनिया पुदीने अलग से उगाने के लिए, ईमानदारी तो ऐसी कूट-कूट कर भरी है कि वहाँ जाने वाली पब्लिक भी गश खाकर गिर जाये।

RTO ऑफिस मे मौजूद दल्ले जो बड़ी बड़ी गाड़ियो मे आते है और अपनी दुकान खोल छाती चौड़ी कर मोटी रकम दलाली की लेते है।

RTO ऑफिस के परिसर मे जनता तो कम, ये दल्ले ज्यादा घूमते है और मिनट से पहले काम 35 कर जेब पर डाका डाल देते है।

ऐसा क्यो होता है हम बताते है, आरटीओ से संबन्धित कार्य के लिए जब लोग कार्यालय में जाते है तो उन्हे बताने वाला कोई नहीं होता कि उनका काम किस तरीके और नियम से होगा। पूछताछ केंद्र पर बताने वाला कोई नहीं होता। किसी भी कर्मचारी से कुछ पूछो तो वो ऐसे बात करता है जैसे वो कुछ बोल कर हम पर एहसान कर रहा हो।

अगर आप देहारादून के “एआरटीओ” के ऑफिस तक पहुँच गए अपनी मनुहार लेकर तो वहाँ पर मौजूद दरबान तुरंत कहता कि साहब मीटिग में है।

दल्लों की मंडली के कुछ किरदार जो तीसरी आँख मे कैद हुये है जरा विडियो को

गौर से सुने और देखे।

क्लिक करे विडियो देखने के लिए :-https://youtu.be/MQshfuhZyv4

फिलहाल ARTO अरविंद पाण्डेय इन दल्लों पर लगाम लगाने और अपने कर्मचारियो को तमीजदार बनाने में नाकाम साबित हो रहे है। जब विभाग के मंत्री महोदय से हमने बात करने की कोशिश की तो कई बार फोन लगाने के बाद भी उनका फोन नहीं उठा।

मुख्यमंत्री कार्यालय में जब फोन किया गया तो तुरंत फोन भी उठा और जल्द ही पूरे मामले को संज्ञान लेकर उचित कार्यवाही की बात की गयी।

अब जब विभाग के मंत्री और अधिकारी ही फोन नहीं उठाते तो काम कैसे करते होंगे उसका तो भगवान ही मालिक है।

एक ड्राइविंग लर्निंग लाईसेन्स बनवाने की फीस 220 रुपये है और लाईसेन्स बनवाने की फीस लगभग 600 रुपये है। RTO मे बैठे दलाल आपसे 3500 रुपये लेते है। इन दलालो पर अंकुश तभी लग सकता है जब वहा के अधिकारी ईमानदार हो। आप विडियो देखे और खुद निर्णय ले।

उत्तराखंड के ईमानदार मुख्यमंत्री से ऐसे अधिकारियों और मंत्रियो को सबक लेना चाहिए कि अपनी कार्य शैली को कैसे ठीक करे और इस दलाली की प्रथा को कैसे बंद करे।

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