उत्तराखंड

सूत्रो की माने तो “शेर ए तराई” की ख्याति प्राप्त और पूर्व स्वास्थ मंत्री तिलक राज बेहड़ देहारादून की कैंट विधानसभा सीट से अपनी ताल ठोक सकते है।

हल्द्वानी और रुद्रपुर से विधायक रह चुके तिलक राज बेहड़, अब अपनी सीमा रेखा को बढ़ाकर देहारादून मे स्थापित करने के मंथनदौर मे है। अपनी काबलियत और स्वच्छ छवि के धनी बेहड़, देहारादून के लिए कोई नया नाम नहीं है। उन्हे बीजेपी और काँग्रेस दोनों के कार्यकर्ता बखूबी जानते और पहचानते है।

देहारादून की कैंट सीट से आने वाले समय में कॉंग्रेस के कई दावेदार हो सकते है लेकिन कोई भी ऐसा स्थापित चेहरा ऐसा नहीं है, जो बीजेपी के वर्तमान विधायक को टक्कर दे सके। सात चुनाव लड़ चुके बेहड़ के पास अनुभव के साथ लोगो के बीच काफी लोकप्रिय भी है।

अब बेहड़ के देहारादून स्थापित होने पर कॉंग्रेस और बीजेपी के नेताओ की “पेशानी” पर बल पड़ सकते है। ये तो आने वाला वक़्त बताएगा कि कितने अनाड़ी इस खिलाड़ी के सामने टिक पाएंगे।

नूरा कुश्ती के माहिर खिलाड़ी बेहड़ क्या आने वाले वक़्त में कैंट विधान सीट से “तिलक” करेंगे या अभिषेक, इसका जबाब तो भविष्य की गर्द मे ही है।

उत्तराखंड का दुर्भाग्य ये है की नेताओ और राजनीति हिलोरे भी मारती है और हिचकोले भी खाती है। सत्रह सालो में सिर्फ एक मुख्यमंत्री विकास और विश्वनीयता का प्रतीक रहा बाकी नेता अपने रिपोर्ट कार्ड मे फिस्सड्डी ही रहे, चाहे काँग्रेस हो या भाजपा दोनों ही प्रमुख दल के आलाकमान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री चुनने मे फेल ही रहे।

कोई भी टिकाऊ, भरोसेमंद, ईमानदार, और विश्वसनीय मुख्यमंत्री ना चुन पाया। इसे तो इस राज्य का दुर्भाग्य ही माना जाए।

वर्तमान मुख्यमंत्री पर भी कुर्सी से रिहाई के लिए चीख पुकार करते विधायको का एक बड़ा समूह पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद रमेश पोखरियाल निशंक के दरबार जा पहुचा और खेवनहार निशंक से मदद की गुहार चाय पार्टी के दौरान लगा डाली।

निशंक का मतलब होता है, “जिन्हे किसी बात की शंका और भय ना हो”! अब अगर इतने विधायको का समूह चीख चिल्ला रहा है, तो इसे वर्तमान मुख्यमंत्री का विधायको के प्रति नकारत्मक टोलरेंस ही माना जा रहा है।

अब निशंक क्या इन लाचार विधायको के खेवनहार बन पाएंगे, ये तो आने वाला वक़्त तय करेगा।

भाजपा के आलाकमान को अब तय करना चाहिए की मजबूत, सुशील, उपयुक्त एवं टिकाऊ भरोसेमंद कौन सा नेता है, जो आने वाले लोक सभा चुनाव और ये बार बार के विद्रोह से उनकी नैया पार लगा सके।

फिर से पुनः ऐसा ना हो कि गच्च से बैठे और भच्च से भरभरा जाए।

त्रिवेन्द्र रावत अगर राजनैतिक रूप से परिपक्व होते तो शायद ये स्थिती ना आती, उन्होने अपने इर्द गिर्द ऐसे लोग नियुक्त कर दिये जो सिर्फ बतोलों की घुट्टी बना कर पिलाने के महारथी है, चाहे उनके मीडिया सलाहकार हो उनके थिंक टैंक सिपेसलाहकारो की फौज, जो सिर्फ सत्ता की मौज ले रहे है उनका मुद्दो और उत्तराखंड जनता से कोई लेना देना नहीं है।

उन जैसे सिपेसलाहकारो लिए तो कुछ शब्द है:-

फूलो से जग आसान नहीं होता है..

रुकने से पग गतिमान नहीं होता है..

है नाश जहां निर्मम वही होता है..

तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो...

पग-पग में गति आती है,छाले छिलने से..

तुम पग-पग पर जलती चट्टान धरो...

मै ठुकरा सकू तुम्हें भी हँसकर..

जिससे तुम मेरा मन मानस पाषाण करो॥

जब संगत बुरी हो और मती भ्रस्ट हो जाए तो “डाकू रत्नाकर” बनते है और जब मार्गदर्शक और संगत अच्छी हो तो डाकू भी रत्नाकर से बाल्मीकी बनते है।

उत्तराखंड को एक ऐसे ही बाल्मीकी की जरूरत है, जो इतिहास रचे अच्छाई, सच्चाई और कर्मठता से कार्य करने के लिए पंडित नारायण दत्त तिवारी जैसा उदाहरण हो।

कुमाऊं की महाकाली नदी पर बनेगा एशिया का सबसे बड़ा बांध

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देहरादून (नेशनल वार्ता ब्यूरो)। उत्तराखंड के इतिहास में एक और अध्याय जुडऩे जा रहा है। ये अध्याय कुमाऊं की महाकाली नदी पर बनने जा रहे एशिया के सबसे बड़े बांध के रूप में होगा। नेपाल से भारत की ओर बहती आ रही महाकाली नदी पर भारत और नेपाल सरकार दोनों एक विशालकाय बांध बनाने जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि यह बांध टिहरी बांध से 5 गुना बड़ा होगा। पंचेश्वर में महाकाली नदी के साथ चार अन्य नदियों गौरीगंगा, धौली, सरयू और रामगंगा का संगम होता है। कुल 5040 मेगावॉट की यह परियोजना दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट कही जा रही है। 311 फीट की ऊंचाई के साथ बनने जा रहे इस बांध को नाम दिया गया है पंचेश्वर बांध। हालांकि, भारत सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना के तहत इस बांध को बनाने के लिए विरोध और समर्थन दोनों के स्वर अभी से सुनाई देने लगे हैं।

rape ki kosish

रूड़की (नेशनल वार्ता ब्यूरो) ।  किशोरी से बलात्कार की कोशिश के मामले में बिरादरी की पंचायत ने एक आरोपी को पीडि़त पक्ष से भरी पंचायत में पांच जूते लगवाकर मामला रफा-दफा करने का फैसला सुना दिया। पुलिस इसी मामले में गांव के चार युवकों के खिलाफ पहले ही मुकदमा दर्ज कर चुकी है। पुलिस कानूनी कार्रवाई करने की बात कह रही है। खड़ंजा कुतुबपुर गांव की किशोरी 18 अगस्त को घर के पास के खाली प्लाट में गई थी। आरोप है कि रास्ते में गांव के सतीश पुत्र चंद्रभान, जितेंद्र पुत्र दयाराम, विजय पुत्र अतरसिंह और लीला पुत्र बिशन ने किशोरी को बंधक बना लिया और पास के एक खाली कमरे में ले जाकर उसके साथ बलात्कार की कोशिश की। इसी दौरान पीछे से किशोरी के परिजनों के आने पर आरोपी भाग गए थे। पुलिस ने उसी दिन चारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। दोनों पक्षों के एक ही बिरादरी के होने से गत दिवस बिरादरी के जिम्मेदार लोगों ने इसके निपटारे के लिए गांव में पंचायत बुलाई। दोनों का पक्ष सुनने बाद पंचों ने चार में से एक आरोपी के लिए पांच जूते लगवाने की सजा सुनाई। दोनों पक्षों के राजी होने के बाद आरोपी को पंचायत में ही बुलवाया गया, जहां किशोरी के परिजनों से उसे पांच जूते लगवाने के बाद दोनों का राजीनामा लिखवा लिया।

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