उत्तराखंड

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उत्तरकाशी , 20-08-2017 (नेशनल वार्ता ब्यूरो) । दयारा बुग्याल में प्रसिद्ध अंढूड़ी उत्सव (बटर फेस्टिवल) धूम-धाम से मनाया गया। मेले में मक्खन की होली खेलने के साथ ही प्रकृति की पूजा की गई। मेले में आए मेलार्थियों ने इस खास तरह के उत्सव में भाग लेकर मखमली बुग्यालों में मक्खन की होली खेली तथा इन लम्हों अपने जीवन में सदा के लिए यादगार बनाया। इस मेले को देखने के लिए मेले में पहुंच पर्यटक भी खासे उत्साहित दिखाई दिए।जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से 42 किलोमीटर की सड़क दूरी तथा भटवाड़ी ब्लाक के रैथल गांव से छह किलोमीटर पैदल दूरी पर स्थित 28 वर्ग किलोमीटर में फैले दयारा बुग्याल में सदियों से अंढूड़ी उत्सव मनाया जाता आ रहा है। इस बार गुरुवार को भाद्रपद की संक्रांति को यह उत्सव मनाया गया। इस उत्सव के उद्घाटन के लिए गंगोत्री विधायक गोपाल रावत दयारा बुग्याल पहुँचे तथा अंढूड़ी उत्सव का उद्घाटन किया।इस उत्सव में देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक पहुँचे और यहां मखमली घास पर मक्खन की होली खेली। इस मौके पर स्थानीय महिलाओं ने लोक नृत्य भी किया तथा अंढूड़ी उत्सव की बधाई दी। गर्मी का मौसम शुरू होने यानी मई माह में क्षेत्र के ग्रामीण अपने मवेशियों के साथ बुग्याली क्षेत्रों में चले जाते हैं और अब इस मेले को मनाने के बाद वापस अपने गांव को लौट जाते हैं, लेकिन लौटने से पहले प्रकृति का शुक्रिया अदा करने के लिए मेले का आयोजन करते हैं, जिसमें प्रकृति की पूजा अर्चना की जाती है।

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देहरादून , 18-08-2017 (सू0वि0)। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास में 'नमामि गंगे' परियोजना के अन्तर्गत गंगा संरक्षण रथ यात्रा के 04 रथों को हरी झण्डी दिखाकार रवाना किया। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अन्तर्गत चारों धामों के मार्ग पर गंगा संरक्षण एवं जन जागरूकता हेतु इन 04 रथों का संचालन कपाट बंद होने तक किया जायेगा। प्रथम रथ #हरिद्वार से #बद्रीनाथ, द्वितीय रथ #रूद्रप्रयाग से #केदारनाथ, तृतीय हरिद्वार से #गंगोत्री तथा चतुर्थ #धरासू से #यमुनोत्री तक नियमित भ्रमण करते हुए लोगों को गंगा संरक्षण के प्रति जागरूक करेंगे। इन रथों में एलसीडी स्क्रीन के साथ ही प्रचार साहित्य इत्यादि भी उपलब्ध रहेगा। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की गंगा की स्वच्छता और निर्मलता के प्रति जो प्रतिबद्धता है उसे पूरा करना है। गंगा के विशाल भूभाग में विस्तृत बेसिन में एक अभियान चला कर हमें गंगा को उसके प्राकृतिक स्वरूप में वापस लाना है। हमें गंगा को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त करना है यह अभियान तब तक चलता रहेगा जब तक गंगा पूरी तरह स्वच्छ नहीं होगी। गंगा के प्रति लोगों की धार्मिक आस्था है। गंगा की महिमा अपरंपार कही गई है, इसे मोक्षदायिनी माना गया है। गंगा के प्रति करोड़ों हिंदुओं की आस्था के अतिरिक्त पूरी दुनिया में अनेक लोगों की भी आस्था है। असंख्य लोगों की गंगा के प्रति आध्यात्मिक दृष्टि है। हमें नमामि गंगा को सफल बनाना है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि गंगा संरक्षण रथ यात्रा अपने लक्ष्य में सफल होगी।    

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देहरादून, 18-08-2017 (सू.ब्यूरो) । देहरादून। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में राज्य निगम अधिकारी/कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों से वार्ता की। वार्ता के दौरान निगमों के पदाधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष विभिन्न मांगे रखी गई। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र ने कहा कि सभी मांगो पर गंभीरता से विचार किया जायेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निगमों की उचित मांगों का उचित समाधान निकाला जाए।

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देहरादून, 15-08-2017 (नेशनल वार्ता ब्यूरो) । एक ओर प्रदेश सरकार पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोकने को लेकर चिंता जाहिर कर रही है,वहीं दूसरी ओर बच्चों की परवरिश और अच्छी शिक्षा के लिये गांव के गांव खाली हो रहे हैं। गांव में बच्चों की किलकारियां और शोर-शराबा अब सुनने को नहीं मिलता, क्योंकि गांव में अब न कोई छोटा बच्चा है और न ही जवान। गांव के सबसे छोटे बच्चे नजदीकी शहर के इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ते हैं और जब गांव में बच्चे हैं ही नहीं तो प्राथमिक और जूनियर स्कूलों का बंद होना लाजमी है। हम बात कर रहे हैं चमोली के संचालित सरकारी स्कूलों की। वर्तमान में चमोली के 9 विकासखंडों में कुल 972 प्राथमिक और 207 जूनियर स्कूल संचालित हो रहे हैं, लेकिन शून्य छात्र संख्या के चलते बीते वर्ष शिक्षा विभाग चमोली ने 12 विद्यालयों पर ताले लगा दिए हैं। लाखों की लागत से बने विद्यालय के भवन अब विरान पड़े हुए हैं। लेकिन सबसे चौकानें वाले आंकड़े 10 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों के हैं। चमोली में 207 प्राथमिक विद्यालय और 35 जूनियर विद्यालय बंद होने की कगार पर हैं, क्योंकि शैक्षिक सत्र 2017 में भी इन विद्यालयों में छात्र संख्या 10 से कम है। चमोली जनपद में कुछ स्कूल ऐसे भी हैं जहां पर सिर्फ 2-3 छात्रों पर स्कूल चल रहा है, यही नहीं 1 छात्र पर भी चमोली में कई प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। हर वर्ष लगातार प्राथमिक स्कूलों की गिरती छात्र संख्या से सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर भी सवाल उठने वाजिब हैं। लोगों का कहना है कि गांव के स्कूलों में नियुक्त मास्टर गांव में नहीं रहना चाहते, वे भी शहर में कमरा ले कर रहते हैं और स्कूल देर से पहुंचते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। कुछ अभिभावकों का यहां तक कहना है कि सरकार को सरकारी स्कूलों का निजीकरण कर देना चाहिए। प्रदेश सरकार भी कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के बंद होने के बाद वहां पढ़ रहे बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो उसके लिए नजदीकी स्कूलो में हॉस्टल और गाड़ी से बच्चों को छुड़वाने की योजना बना रही है। लेकिन पहाड़ की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सरकार की यह योजना पहाड़ पर पहाड़ बनकर साबित हो सकती है।

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