उत्तराखंड

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आजकल के फैशन के हिसाब से लोग आजकल जीन्स के बाहर अंडरवियर दिखाते है, चड्डी अगर महंगी कंपनी की है तो ज्यादा बाहर मुह निकाल लेती है। इसके उलट उत्तराखंड की राजधानी देहारादून में एक ऐसा प्राधिकरण भी है जो इसके उलट काम करता है।

अंडरवियर अगर महंगी है तो हाई वेस्ट जीन्स पहना देता है और अगर लो क्लास या मीडियम क्लास है तो ऐसे उधेड़ता है कि आम आदमी अंडरवियर छोड़ भाग ले।

प्राधिकरण के अधिकारी बयान तो ऐसे देते है जैसे पुराने समय लोग पिक्चर देखते हुये चिल्लर फेकते थे। सफेदपोश और रसूखदार लोगो को तो ऐसे ट्रीट किया जाता है जैसे नया-नया दामाद घर आया हो।

एक अधिकारी के संरक्षण में टोंस नदी का रुख मोड़कर नियमो के विपरीत वहाँ पर आलीशान होटल का निर्माण किया जा रहा है।

रिजर्व ग्रीन फॉरेस्ट में प्राधिकरण के राज ज्योतिष ने रिज़ॉर्ट/आश्रम बनवा दिया और दिखाने की कार्यवाही के नाम पर नोटिस काट कर इतिश्री कर ली।

सचिवालय से महज़ 500 मीटर पर कितना बड़ा अवैध निर्माण कार्य चल रहा है और प्राधिकरण के अधिकारी बोलते है कि नोटिस काट दिया है और वाद चल रहा है, उस अवैध निर्माण को रोकने का काम कौन करेगा ?

धोरणखास में लगभग 25 बीघा में दो बिल्डरों ने अवैध प्लाटिंग कर दी और उसमे से एक हरियाणा का बिल्डर है और प्राधिकरण ने  नोटिस काट कर इतिश्री कर ली। वहाँ पर काम कौन रोकेगा ?

प्राधिकरण के गूंगे बहरे अधिकारियों सरकार आपको सैलरी देती है और आप क्या करते है? सरकार को कोर्ट के कटघरे मे खड़ा करते है।

सिर्फ आप जैसे निर्लज्ज अधिकारियों की वजह से सरकार के कामो पर कोर्ट को हस्ताक्षेप करना पड़ता है और ये फजीहत का कारण कौन है?

सरकार के मुखिया अब मूड मे आ गए है, अभी देखा ना टेलर एनएच74 वाला। सरकार के मुखिया को तो पूरे प्राधिकरण का अंकेक्षण करवाना चाहिए। ताकि कितना लपोड़ के घी कौन-कौन घर ले गया है उसकी भी पिक्चर रिलीज़ हो और तब जनता तुम्हारी पिक्चर देख चिल्लर उछाले।

जीरो टालरेंस की सरकार के मुखिया जल्द ही ऐसे भ्रस्ट अधिकारियों की जीन्स और अंडरवियर दोनों उतार कर उनके पिछवाड़े पर संटी बजाने वाले है ताकि भ्रस्टाचार पर लगाम लगे और भ्रस्टाचारियों को सबक मिले ।

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देहारादून। जिले मे एक ऐसा विवादित ऐबकारी अधिकारी है जो सुरा की दुकानों से बलपूर्वक एक चोट्टे की तरह रकम उड़ा लेता है। जी हाँ ये सच है जिला देहारादून मे एक अधिकारी ने विभाग के अधिभार की वसूली एक सुरा की दुकान से बलपूर्वक गल्ले मे हाथ डालकर कर ली।

खोजी नारद आपको उस ऐबकारी अधिकारी की जुबानी अपनी चोट्टे वाली हरकत को दिखाएगा और सुनवाएगा भी, क्या अब विभाग नियम और कायदो को ताक पर रख देंगे ऐसे चोट्टे अधिकारी का साथ देगा या इस पर कार्यवाही करेगा?

एक सुरा व्यवसायी द्वारा ऐसे अधिकारी के खिलाफ एक थाने में तहरीर दे दी गयी है। अब क्या उस अधिकारी पर गल्ले मे से बलपूर्वक रकम को निकाले जाने का मामला दर्ज होगा क्या?

पूरी खबर सिर्फ खोजी नारद पर कल?

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देहारादून। जब बच्चे छोटे होते है तो माँ बच्चे की हड्डियों को मजबूत करने के लिए डाबर का तेल लगाती है । उत्तराखंड की राजधानी देहारादून में भी मसूरी देहारादून विकास प्राधिकारण मे डाबर का तेल खूब चर्चा का केंद्र बन रहा है । एमडीडीए के आला अधिकारियो पर डाबर के तेल की ऐसी मालिश हुई कि उन्होने अपनी हड्डियों को बचाने के लिए एक बिल्डिंग का मानचित्र स्वीक्रत कर दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय से महज 500 मीटर पर एक बिल्डिंग के कम्पौंडिंग मानचित्र को मंजूरी दे दी गयी जो नियमो को ताक पर रखकर बना है। पूरे उत्तराखंड में माननीय हाईकोर्ट के निर्देश पर अवैध अतिक्रमण पर प्रशासन और एमडीडीए ने अभियान छेड़ रखा है, और अगर कोई महज एक शपथ पत्र के आधार पर अपना अवैध मानचित्र शमन करवा ले और प्राधिकारण के आला अधिकारी उसके बाद डाबर के तेल से मालिश करवा अपनी आंखे मूद कर सो जाए तो उसे क्या कहा जाएगा।

ये तो शोले की बसंती वाली बात हो गयी कि हमे बकबक करने की आदत भी नहीं है और नियम के अनुसार शपथ पत्र ले लिया है अगर उक्त प्रकरण से संबन्धित प्राधिकारण को कोई शिकायती पत्र मिलेगा तो कार्यवाही जरूर होगी। इस टाइप के बयान आपको समाचार पत्रो में और न्यूज़ चैनल में प्राधिकरण के आला अधिकारियों के सुनने को मिलते रहते होगे। केष्टो मुखर्जी का नाम तो आप जानते होंगे? प्राधिकरण के एक आला अधिकारी भी केष्टो मुखर्जी के अवतार मे है चंपी तेल और मालिश? सर तो तेरा चकराय या दिल डूबा जाए, आजा प्यारे पास हमारे, काहे घबराए?

अबकी बार कुछ अलग होगा क्यूकि इस आला अधिकारी पर ऐसा शोध हुआ है जिससे आप सभी अवगत होना चाहेंगे। एक कंपनी जिसकी फ़ाइल गुम होने की रिपोर्ट भी दर्ज कारवाई जाती है और उसके बाद जांच को प्रभावित भी किया जाता है, क्या है पूरा मामला जल्द आपको खोजी नारद अवगत करवाएगा?

फिलहाल दीगर बात ये है कि डाबर का ऐसा कौन सा तेल है जिससे प्राधिकरण के अधिकारियों की जमकर मालिश हुई है? यह मालिश किस सफेदपोश ने की और उत्तराखंड के ईमानदार हाकिम किसकिआँख कि किरकिरी बने हुये है? पूरी खबर जल्द आपके समक्ष।

सूत्रो की माने तो प्राधिकरण के दो आला अधिकारी उत्तराखंड के हाकिम के रडार पर है जिन पर कार्यवाही जल्द होनी है और अगर ऐसा होता है तो भ्रस्टाचार पर जरूर लगाम लगेगी ।

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देहरादून। कहते हैं कुछ लोग इतिहास लिखा करते हैं और कुछ लोग इतिहास बन जाते हैं जी हां ऐसा ही एक इतिहास देहरादून के इस युवा पत्रकार ने बना दिया है। हम बात कर रहे हैं देहरादून में पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाले नारायण परगाई की, जिनका नाम मीडिया जगत में हलचल के रूप में जाना जाता है। लेकिन देहरादून में काठगोदाम से चलने वाली नई ट्रेन नैनी दून जन शताब्दी में सफर करने के बाद देहरादून पहुंचने वाले वह पहले यात्री बन गए हैं। उनका देहरादून पहुंचने पर BJP के कई नेताओं ने फूल मालाओं से स्वागत भी किया।

उनके इतिहास बनने के पीछे की कहानी यह भी है कि काठगोदाम से देहरादून तक का सफर करने के बाद हालांकि वह पूरी ट्रेन में अकेले नहीं थे, लेकिन उनके इतिहास बनने की कहानी उनके देहरादून स्टेशन पर उतरने वाले पहले यात्री के रूप में बनी है। बता दे किसी भी राज्य में नई ट्रेन के संचालन करने वाले राज्य में और उस में सफर करने वाले यात्री इतिहास के गवाह बनते हैं और इन इतिहास के पन्नों उनका नाम हमेशा के लिए दर्ज हो जाता है।

काठगोदाम से देहरादून चली नई ट्रेन के सफर करने वाले लोगों ने भी कुछ ऐसा ही इतिहास कायम किया है इस नई ट्रेन के सफर को लेकर हालांकि कई राजनीतिक बातें भी सामने आई हैं लेकिन काठगोदाम से देहरादून तक चलने वाली ट्रेन आम जनता को पूरा फायदा देती हुई भी नजर आएगी।

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