उत्तराखंड

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पंजाब नेशनल बैंक भरोसे का प्रतीक अब नहीं रह गया है, नीरव मोदी का घोटाला सामने आने के बाद लोगो का

भरोसा टूटता जा रहा है। देहारादून में पंजाब नेशनल बैंक की अधोईवाला ब्रांच की खाता धारक अंजलि नयाल के

साथ तो ऐसा ही हुआ। खोजी नारद को उन्होने अपने साथ हुई धोखाधड़ी की कहानी को खुद बयां किया। अंजलि द्वारा लाइफ स्टाइल के शोरूम से 9 जुलाई 2017 को लगभग 4564/- रुपए की खरीददारी की गयी और पीएनबी का मास्टर डेबिट कार्ड से पेमेंट किया गया। पहली बार कार्ड स्वाइप करते समय कार्ड का ट्रांजकशन फेल हो गया,

जब शो रूम द्वारा दोबारा कार्ड को स्वाइप किया तब ट्रांजकशन ओके हुआ । उसके बाद जब अंजलि द्वारा कुछ

समय बाद अपनी पासबूक अपडेट कारवाई गयी तब उनको पता चला कि उनके खाते से दो बार 4564/- रुपए

कट गए है।

(विडियो देखे और इस लिंक पर क्लिक करे-:)

https://youtu.be/RNmfrcy1Pnk


जब अंजलि द्वारा बैंक से इस बाबत पूछा गया और ट्रांजकशन फेल और सक्सेस की स्लिप दिखाई गयी तब बैंक ने

कहा की आपके खाते में रुपए वापस आ जाएंगे। इ स बात को एक वर्ष पूरा होने वाला है और अंजलि के रुपए आज

तक वापस नहीं आए। बैंक पर चक्कर काट काट कर अंजलि ने रुपए वापस मिलने की उम्मीद छोड़ दी है।

जब खोजी नारद की एक बैंक अधिकारी से बात हुई तो उन्होने नाम ना छापने की शर्त पर सही बात बताई और

कहा कि पीएनबी के वेंडर ही बैंक को चूना लगा रहे है, उन्होने बताया की मास्टरकार्ड एक अमेरिकन कंपनी है, जब

पीएनबी द्वारा ऐसी ट्रांजकशन के रिफ़ंड की मेल की जाती है तब मास्टरकार्ड कंपनी द्वारा कोई सपोर्ट नहीं मिलता

है और थक हार कर बैंक ग्राहक को टहलाता रहता है। अब आप ही सोचिए ऐसे कितने हजारो और लाखो ग्राहक

होंगे जो ऐसी ठगी का शिकार हुये होंगे और बैंक के चक्कर काट काट कर थक चुके होंगे और अपने रकम भूल

चुके होंगे।

लोगो की गाढ़ी कमाई का ये रुपया आखिर किसकी जेब मे गया होगा। आप अंजलि नयाल का विडियो देखिये कि

एक साल बीत जाने के बावजूद भी उनको अपने रुपए वापस नहीं मिले। क्या पीएनबी का वेंडर मास्टर कार्ड लोगो

कीजेब पर डाँका डालने का साधन तो नहीं।

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आज कल का जमाना बड़ा खराब है अपने ही चिराग अपना घर फूँक तमाशा देखकर मज़े ले रहे है। अब “चच्चा के बच्चे” को ही ले लो, पाल पोस बड़ा किया, अब चच्चा के आगे पीछे बच्चा कलम को तलवार बना घुसा घुसा कर घायल कर रहा है।

एक समय मे “चच्चा का बच्चा” “भीषण सलाहकार” बन बैठा और ज्ञानी होने का अहम पाल बैठा, एक दिन इस विभीषण ने साहब का सपना ही

चूर-चूर नान कर दिया। इतना मक्खन लगा दिया साहब के, और फिर चूर-चूर कर दिया उनको, बस साहब देर से समझे।

अब चच्चा के बच्चे के पीछे एक खबरनवीज पड़ गया, बच्चे ने अपने ज्ञानी पंडित वाला दिमाग लगा कर उसको अपने साथ मिला लिया।

अब उस खबरनवीज़ को बच्चा बोला की मेरे पास तो कुछ नहीं सब साहब के गुर्गे ले गए, तुम को चच्चा ज्ञान देता हूँ।

बस फिर क्या था एक टाइपिंग मिस्टेक को हथियार बना खरनवीज को बोला मेरा नाम छाप दो, फिर देखो सभी

“आ-लाये सरकार” चच्चा के पीछे होंगे। हुआ भी यही “आ-लाये सरकार” ने तुरंत अपने हाकिमों को वस्तुस्थिति से

अवगत कराने को बोला।

अब परेशान चच्चा तुरंत अपने बच्चे के पास जाएगा या नहीं ?

बच्चा अंदर ही अंदर खुश है की खबरनवीज़ पहले उसके पीछे था उसका दिमाग घुमा चच्चा के पीछे लगा दिया।

खबरनवीज़ भी खुश हो भागा-भागा घूम रहा है बच्चे ने काम पर जो लगा दिया।

अधूरा ज्ञान शेर को बिल्ली तो बना गया लेकिन एक दिन तो साहेबे शेर का रुक्का परचम पर आएगा जरूर।

"बच्चा" अब खाली भी था क्योकि भीषण सलाहकार “विभीषण” बनकर साहब की नैया डुबो आया था, अब ज्ञानी

पंडित किसको अपने ज्ञान का प्रसाद बांटे। तो अपने दुश्मनों की लिस्ट बना साफ करने मे लगा है। ना इस बच्चे के

गेम को चच्चा समझ पाये और ना ही खबरनवीज़। अब आ-लाहे सरकार को भी खबरनवीज़ द्वारा घेरे मे ले लिया।

अब बारी किसकी ये अगली किस्त में क्यूकि परकाश कम हो गया है अब परकाश गद्दे में सोएगा।

 

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देहारादून। कल शाम एक दैनिक समाचार पत्र के कार्यालय मे सर्वर रूम में शॉट सर्किट हो जाने से आग लग गयी, कोई जनहानि नहीं हुई सभी पत्रकार बंधु और कर्मचारी सुरक्षित है।

चूंकि मै खुद पत्रकारिता के क्षेत्र से हूँ इसलिए बारीकी से खबर पर नजर रखता हूँ। कल उसी दैनिक समाचार पत्र में एक विज्ञापन छपा था फ्रंट पेज पर, एक बिल्डर द्वारा अपने फ्लैट बेचने हेतु विज्ञापन दिया गया था। ये वही बिल्डर है जिनको 13 अप्रैल 2018 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिकाकर्ता आज़ाद अली की याचिका के बाद नोटिस जारी हुआ है। कुछ माह पूर्व जब हाईकोर्ट उत्तराखंड मे याचिकाकर्ता द्वारा याचिका कोर्ट में दायर की गयी थी, तब भी कई दैनिक समाचार पत्रो में विज्ञापनो की भरमार थी।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में नदी की भूमि पर पट्टे आवंटित करना और फिर उसको भूमिधर करने के साथ-साथ उत्तराखंड सरकार के ज़ी.ओ. का हवाला भी है।

जो हाई कोर्ट उत्तराखंड के आदेश पर 04-07-2013 जनहित रिट संख्या-233/2008 में उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी किया गया था, जिसमे 2 आदेश साफ साफ किये गए थे:-

1    1- किसी भी निर्माण कार्यो के लिए नदी श्रेणी में दर्ज भूमि पर अग्रिम आदेशो तक प्रस्तावित ना किया जाये।

      2- अग्रिम आदेशो तक नदी श्रेणी में दर्ज किसी भी भूमि पर निर्माण किए जाने की अनुमति ना दी जाये।

अब जब सरकार द्वारा जी.ओ. जारी हो गया था तब बिल्डर द्वारा मानचित्र कैसे स्वीकृत कैसे करवा लिया गया और प्राधिकरण ने कैसे मानचित्र स्वीकृत कर दिया।

खैर अब मुद्दे की बात तो ये है कि नदी के नाम पर राजनीति करने वाले सत्ता के शीर्ष पर तो जरूर पहुंचे पर अर्श से फर्श पर कब आए पता न चला। हमारे राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत जी भी गंगा से जुड़े हुये है, नमामि गंगे के राष्ट्रीय संयोजक भी रहे है।

नदियो का दोहन उनके राज्य में ज्यादा हो रहा है और नदियां जो सभी मनुष्य एवं जानवरो के जीवन का अति महत्वपूर्ण हिस्सा है वो त्रिवेन्द्र रावत जी को अगाह कर रही है कि अभी भी वक़्त है हमे बचा लो। त्रिवेन्द्र जी संवेदनशील व्यक्तिव के धनी भी है और नदियो के महत्व को बखूबी समझते भी है। अब नदियो को कैसे भूमाफियाओ द्वारा बचाना है उनके रुख को सभी आने वाले समय में देखेंगे।

मीडिया का आम आदमी के जीवन में भी महत्वपूर्ण योगदान है, लोग आज भी मीडिया को अपने जीवन का महत्वपूर्ण अंग मानते है। हम अगर सच से परे हो जाएँगे तो फिर प्रकृति हमे अगाह करती ह। विज्ञापन लेना और देना दोनों गुनाह नहीं है पर अपनी किसी गलती और गुनाह पर पर्दा डालने के लिए विज्ञापन का सहारा देना और लेना दोनों ही गुनाह है और प्रकृति हमे कुछ ना कुछ अंदेशा जरूर देती है जिसे हम अपशगुन का नाम देते है।

अगर नदियां ही ना बची तो व्यक्ति अपनी जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता है, किसी का जीवन बचाना बहुत बड़ा उपकार होता है और सभी के जीवन से जुड़ी हुई नदियो को बचाना बहुत बड़ा परोपकार है साथ में हमारा ही कर्तव्य भी है। कोई भी अगर सभी के जीवन से खिलवाड़ करेगा तो प्रकृति भी हमसे खिलवाड़ करेगी। तब हम चाह कर भी खुद को बचा नहीं पाएंगे।

 

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बात जब निकलती है तो दूर तलक जाती है अब साहब ने भी अपनी खुफिया टीम को कल्लू के पीछे

लगा दिया है। कल्लू की बेनामी और नामी संपत्तियो के कागज देख साहब के होश भी फाख्ता है वो सोच

रहे है कि इस कल्लू को गद्दे की रुई की तरह कैसे धुना जाए।

देहरादून में घुसते ही बंद पड़े कारखानो वाला राज भी साहब तक पहुँच गया। नामी, बेनामी, नौकर-चाकर

सब के नाम पर और नदी, खाले, सभी पतरी देख साहब दाँत पीस रहे है।

सूत्र की माने तो साहब कर्री रिपोर्ट बना कर सरकारी जाल कल्लू पर डालने की कवायद कर रहे है।

क्योकि साहब तीसरी आँख से हुये जख्म भूले नहीं है जिसको कल्लू द्वारा अंजाम दिया गया था। अब

कल्लू को भी खबर लग चुकी है कि साहब की अरही घुसने वाली है तो कल्लू ने अपने जवां खून को

दिमाग दिया कि कमल के फूल वाले भंवरों को जरा चारा डाल दो कम से कम हमारे प्रति चीनी कम ना हो।

जंवा खून ने तुर्रा-ए-पुर-पेच-ओ-खम का पासा फेक दिया और जैसे साहब को घेरा था वैसे कमल वाले भँवरे भी जाल में फंस गए और अब नोट के साथ कल्लू अपनी मन मर्जी का सपोर्ट भी लेगा।

अब जैसा सोचते है अधिकतर होता वैसा नहीं है भंवरो को वश में कर लिया कल्लू ने लेकिन भँवरो के सरदार के पास कल्लू और पूरे खानदान की जन्म कुंडली पहुँच गयी। अब साहब और कमल के भँवरो के सरदार दोनों कल्लू की कायनात ध्वस्त करने में साथ-साथ है।

अब मसमसाया हुआ कल्लू भाई, साहब को ढेर-ढेर और अनाप-शनाप बकने में है पर कल्लू एक बात भूल गया कि बुड्ढे शेर के पंजे की खरोच भी खतरनाक होती है।

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